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अब देश के 22 राज्यों में होने जा रहा SIR, नागरिकता साबित करने के लिए तैयार रखें ये डॉक्यूमेंट

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर ) से संबंधित तैयारी का काम जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है, क्योंकि इस प्रक्रिया के अप्रैल से शुरू. . .

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर ) से संबंधित तैयारी का काम जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है, क्योंकि इस प्रक्रिया के अप्रैल से शुरू किए जाने के आसार हैं।
एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने पर सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) इसके दायरे में आ जाएंगे। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, लद्दाख, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे पत्र में निर्वाचन आयोग ने कहा कि मतदाता सूची के अखिल भारतीय एसआईआर का आदेश पिछले साल जून में दिया गया था।
बिहार में एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभी जारी है। असम में एसआईआर के बजाय ‘विशेष पुनरीक्षण’ 10 फरवरी को पूरा हो गया था।
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स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन क्या है?

वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन कहा जाता है। ये इलेक्शन कमीशन की तरफ से किया जाने वाला एक प्रोसेस होता है, जो कभी छोटे तो कभी बड़े लेवल पर किया जाता रहा है। इस प्रोसेस में 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है. ऐसे लोग जिनकी मौत हो गई है, उनका नाम वोटर्स लिस्ट से काटा जाता है। इसके साथ ही इस प्रोसेस में वोटर्स के नाम, फोटो, एड्रेस वगैरह में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है. इलेक्शन कमीशन ने 1951 से लेकर 2004 तक करीब 8 बार SIR कराया है. आखिरी SIR 21 साल पहले 2002 से लेकर 2004 में पूरा किया गया था।

जानिए SIR प्रक्रिया में क्या होता है

बीएलओ आपके घर आएं तो परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड, उम्र सर्टिफिकेट और निवास प्रमाण पत्र होना जरूरी है। इसके अलावा अगर आपके परिवार में किसी सदस्य की उम्र 18 साल हो गई है, तो उसका नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा सकता है। अगर परिवार का सदस्य किसी अन्य जगह शिफ्ट हो गया है, तो उसका नाम हटाकर नई जगह जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा आपके वोटर आईडी में फोटो पुरानी या धुंधली हो चुकी है, तो उसे साफ फोटो देकर हटवा सकते है।
SIR प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर मतदाता सूची में दर्ज व्यक्ति के बारे में जांच करते हैं। इसके जरिए पता लगाया जाता है कि दर्ज व्यक्ति अभी वहां रहता है या नहीं। वहीं अगर किसी मतदाता की मृत्यु हो जाती है तो उनका नाम हटाया जाता है। इसके अलावा नाम, उम्र, खराब क्वालिटी वाली फोटो और एड्रेस की गड़बड़ी को इस अभियान के साथ ठीक किया जाता है।

SIR के लिए इन डॉक्यूमेंट्स को दिखाना होगा

SIR के दौरान अपनी आइडेंटिटी और रेजिडेंशियल एड्रेस प्रूफ दिखाना होता है। इसमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बिजली-पानी या गैस का बिल, बैंक पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड और 2002 की वोटर लिस्ट की प्रति को मान्य दस्तावेज माना जाएगा। ये सभी कागजात व्यक्ति की पहचान और स्थायी पते की पुष्टि के लिए जरूरी होंगे।

इन लोगों को डॉक्यूमेंट नहीं दिखाना

जिन लोगों का नाम 2002 की लिस्ट में है, उन्हें सिर्फ फॉर्म और उसके साथ 2002 की लिस्ट का प्रिंटआउट जमा करना होगा। इसके सिवाय कोई और डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं होगी। अगर किसी वोटर का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता का नाम इस लिस्ट में है, तो उसे काउंटिंग फॉर्म के साथ आईडी प्रूफ और अपने 2002 की लिस्ट में दर्ज माता-पिता के नाम का सर्टिफिकेट पेश करना होगा।

क्या डॉक्यूमेंट नहीं दिखाने पर नाम कट जाएगा?

सिर्फ डॉक्यूमेंट्स नहीं दिखाने पर वोटर लिस्ट से नाम नहीं हटेगा। BLO वोटर से संपर्क करेगा। अगर व्यक्ति की पहचान और स्थायी निवास की पुष्टि नहीं हो पाती है, तभी नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि ये पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और हर वोटर को डॉक्यूमेंट दिखाने का पूरा मौका मिलेगा।

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