डेस्क। होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भाईचारे और सकारात्मक ऊर्जा का उत्सव है। फाल्गुन पूर्णिमा के बाद मनाई जाने वाली रंगों वाली होली हमें यह संदेश देती है कि जीवन में चाहे कितनी भी नकारात्मकता क्यों न हो, प्रेम और आनंद से सब कुछ बदला जा सकता है। आध्यात्मिक रूप से होली आत्मा की प्रसन्नता और मन की शुद्धि का प्रतीक है।
आज होली खेलने का शुभ मुहूर्त क्या है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार होली खेलने का सबसे शुभ समय प्रातःकाल से दोपहर तक, यानी लगभग सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक माना जाता है। इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा रहती है और दिन का प्रकाश भी पूर्ण रूप से फैल चुका होता है। कुछ लोग अभिजीत मुहूर्त (लगभग दोपहर 12 बजे के आसपास) को भी शुभ मानते हैं, लेकिन पारंपरिक रूप से सुबह का समय अधिक मंगलकारी माना जाता है।
कितने बजे होली नहीं खेलनी है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होली पर सूर्यास्त के बाद रंग खेलने से बचना चाहिए, क्योंकि माना जाता है कि इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा की जगह नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होने लगती हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद रंग खेलने से व्यक्ति के जीवन में अनचाही परेशानियां, मानसिक अस्थिरता या नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं।
रंग खेलने का सही समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज सुबह से ही रंग खेलना शुभ माना जा रहा है. परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, होली खेलने का सही समय सुबह का होता है। ऐसा माना जाता है कि दिन की शुरुआत में वातावरण ज्यादा शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है, इसलिए इस समय रंग खेलना शुभ माना जाता है। आमतौर पर लोग सुबह 8 बजे से रंग खेलना शुरू करते हैं और दोपहर 12 या 1 बजे तक इसे समाप्त कर देना बेहतर होता है। दोपहर के बाद ज्यादा देर तक रंग खेलना या शोर-शराबा करना उचित नहीं माना जाता है. इसलिए कोशिश करें कि होली का आनंद सुबह के समय ही लें और समय रहते उत्सव को शांतिपूर्वक समाप्त कर दें, ताकि दिनभर की ऊर्जा और खुशी बनी रहे।