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उम्मीदवारों के ऐलान के बाद बढ़ा तृणमूल कांग्रेस में सामने आया आंतरिक कलह , खंडघोष और मोंटेश्वर ने फूंका बगावत का बिगुल

सिलीगुड़ी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पूर्व बर्धमान जिले के खंडघोष और मोंटेश्वर विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद नेताओं. . .

सिलीगुड़ी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पूर्व बर्धमान जिले के खंडघोष और मोंटेश्वर विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तीखा विवाद छिड़ गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी को इन क्षेत्रों में बड़े संगठनात्मक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

सामूहिक इस्तीफा की चेतावनी

खंडघोष में टीएमसी ने नवीन बाग को उम्मीदवार घोषित किया है, जिसके बाद स्थानीय नेतृत्व का एक बड़ा हिस्सा खुलकर विरोध में उतर आया है। ब्लॉक अध्यक्ष अपार्थिब इस्लाम समेत कई क्षेत्रीय अध्यक्षों और जिला परिषद के पदाधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उम्मीदवार नहीं बदला गया, तो वे सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा देकर चुनाव में निष्क्रिय रहेंगे।

आरोप, मर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है,

विरोध कर रहे नेताओं का आरोप है कि पार्टी में पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि अन्य दलों, खासकर सीपीएम से आए नेताओं को बार-बार टिकट दिया जा रहा है। उन्होंने जिला परिषद के स्वास्थ्य कर्माध्यक्ष विश्वनाथ राय को उम्मीदवार बनाने की मांग की है। नेताओं का कहना है कि वे वर्षों से पार्टी के लिए संघर्ष करते आए हैं, जेल गए हैं, और कठिन परिस्थितियों का सामना किया है, लेकिन अब उन्हें दरकिनार किया जा रहा है।

र्टी में भ्रष्टाचार और पैसे के लेन-देन के आधार पर निर्णय लिए जा रहे : इस्लाम

अपार्थिब इस्लाम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे पार्टी के फैसले के खिलाफ जाने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें “बाहर का रास्ता” दिखा दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में भ्रष्टाचार और पैसे के लेन-देन के आधार पर निर्णय लिए जा रहे हैं। हालांकि, इस पूरे विवाद पर उम्मीदवार नवीन बाग ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।

मोंटेश्वर से मंत्री सिद्दिकुल्ला चौधरी को फिर से उम्मीदवार

दूसरी ओर, मोंटेश्वर विधानसभा क्षेत्र में भी स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। यहां टीएमसी ने राज्य के मंत्री सिद्दिकुल्ला चौधरी को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जिसके बाद पार्टी के दो गुटों के बीच हिंसक झड़पें हो गईं। दिगनगर गांव में सिद्दिकुल्ला समर्थकों और पंचायत समिति अध्यक्ष अहमेद हुसैन के समर्थकों के बीच मारपीट और बमबाजी की घटनाएं सामने आईं।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस और केंद्रीय बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को नियंत्रित किया। इस हिंसा में कम से कम एक व्यक्ति के घायल होने की खबर है। क्षेत्र में तनाव अब भी बना हुआ है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
मोंटेश्वर में यह पहली बार नहीं है जब सिद्दिकुल्ला चौधरी को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष सामने आया है। पिछले कुछ महीनों से उनके खिलाफ पार्टी के ही कार्यकर्ता आवाज उठा रहे हैं। कई बार उनके गुट और विरोधी गुट के बीच झड़पें भी हो चुकी हैं।

अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी :चौधरी

हाल ही में एक आंतरिक बैठक के दौरान सिद्दिकुल्ला चौधरी ने बिना नाम लिए अपने विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनकी सहनशीलता की वजह से अब तक बड़े टकराव टले हैं, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने टीएमसी के संगठनात्मक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव से ठीक पहले इस तरह का आंतरिक संघर्ष विपक्षी दलों के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है। खासकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीएमसी नेतृत्व ने समय रहते इन विवादों को नहीं सुलझाया, तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है। पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और असंतोष न केवल संगठन को कमजोर कर रहा है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिरा रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि पार्टी नेतृत्व इन हालात से कैसे निपटता है और क्या असंतुष्ट नेताओं को मनाने में सफल हो पाता है या नहीं। चुनावी रणभूमि में उतरने से पहले टीएमसी के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

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