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“जानलेवा नशे” की महामारी : एक गांव में 35 से अधिक की मौत, युवा नशे के लिए कर रहे हैं इंसानियत की आखिरी हदें भी पार

सिरसा। हरियाणा में नशा अब सिर्फ आदत नहीं बल्कि ऐसा जख्म बन चुका है जिसे सिस्टम की लापरवाही और समाज की चुप्पी सींच रही है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि युवा नशे के लिए इंसानियत की आखिरी हदें. . .

सिरसा। हरियाणा में नशा अब सिर्फ आदत नहीं बल्कि ऐसा जख्म बन चुका है जिसे सिस्टम की लापरवाही और समाज की चुप्पी सींच रही है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि युवा नशे के लिए इंसानियत की आखिरी हदें भी पार कर रहे हैं। पहले अपनी नसों से खून निकालते हैं। उसमें गुलाबी गोलियां घोलते हैं और फिर उसी जहर को वापस शरीर में घोल लेते हैं। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि गांव-गांव में फैली वह सच्चाई है जिसे देखकर रूह कांप जाए।
सिरसा जिले के रानियां हलके के तकरीबन छह हजार आबादी वाले गांव ओटू में ग्रामीणों ने जो दास्तान सुनाई उसने गांवों में गुपचुप तरीके से पहुंचते नशे, मौत से खेल रहे युवाओं, लाचारी में फंसे उनके बुजुर्ग मां-बाप, पत्नी व बच्चों और आंखें मूंदकर बैठे जिम्मेदारों की हकीकत सामने ला दी।

पानी न मिलने पर अपने ही खून में नशा घोलते हैं

ओटू के पड़ोसी गांव ढाणी प्रताप की महिला सरपंच के पति सुनील कुमार ने बताया कि वह तकरीबन 15 वर्ष से ओटू गांव में फोटो स्टूडियो चला रहे हैं। ज्यादातर समय ओटू गांव में ही बीतता है। सुनील के मुताबिक, सिर्फ ओटू ही नहीं बल्कि आसपास के कई गांव में नशे की लत में फंसे युवाओं की मानसिक स्थिति खराब होने लगी है। कई बार पानी नहीं होने पर वे अपने खून में नशे की गोलियां मिलाकर इंजेक्शन लगा रहे हैं। गांव के श्मशान घाट के पास देर शाम या रात में अक्सर ऐसा करते युवा देखने को मिल जाते हैं।

गांव में 35 से अधिक युवाओं की मौत, सबकी उम्र 16 से 25

ओटू गांव निवासी बूटा सिंह ने बताया कि नशे की लत में गांव में काफी युवा फंसे थे। कोविड-19 के बाद ये काला सच तेजी से उजागर हुआ। दरअसल, कोरोना काल में नशा नहीं मिलने के कारण युवाओं की मौत शुरू हो गई। कोविड-19 के बाद से अब तक मेडिकल नशे में फंसे 35 से अधिक युवाओं की मौत हो चुकी है।
नशे के दलदल में फंसे युवाओं की जान की कीमत नहीं बची है। ढाणी प्रताप के पूर्व सरपंच होशियार सिंह के मुताबिक नशे के दलदल में ओटू सहित कई गांवों के युवा फंस चुके हैं। गांव में नशे के कारण लगातार मौत हो रही है।

युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए नौ साल में नहीं बन पाया खेल मैदान


ओटू के रहने वाले ब्लॉक समिति के सदस्य गुरुदेव सिंह के मुताबिक युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए स्थानीय प्रशासन ने 2017-18 में गांव में खेल मैदान बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए पंचायत की ओर से दो एकड़ जमीन भी उपलब्ध करवाई गई थी लेकिन अब तक खेल मैदान का काम नहीं हुआ है। उस दो एकड़ जमीन पर अब कूड़ाघर बना हुआ है। इस संबंध में जब सीईओ डॉ. सुभाष से बात की गई तो उन्होंने कहा कि गांव में खेल मैदान बनाने का काम प्रक्रियाधिन है। इसे जल्द पूरा करवाया जाएगा।

नशे ने एक पोते को निगला, दूसरा नशामुक्ति केंद्र में भर्ती

गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग मुख्तियार ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि कुछ माह पूर्व ही उनके 19 वर्षीय छोटे पोते की नशे के ओवरडोज से मौत हो गई थी। नशे का इंजेक्शन उसके हाथ में फंसा हुआ मिला था। उनका बड़ा पोता राजस्थान के हनुमानगढ़ स्थित एक नशामुक्ति केंद्र में उपचाराधीन है। उनके परिवार ने मेहनत-मजदूरी करके छोटे पोते के इलाज पर लगभग साढ़े चार लाख रुपये खर्च किए फिर भी उसे बचा नहीं सके।

एक दिन में दो युवकों की मौत

ओटू के ग्रामीणों ने बताया कि 23-24 अक्तूबर को एक ही दिन में नशे के ओवरडोज से गांव के दो युवकों की मौत हो गई थी। इनमें 20 वर्षीय सुखचैन और 19 वर्षीय विक्की शामिल हैं।

नशे ने एक पोते को निगला

गांव के 85 वर्षीय बुजुर्ग मुख्तियार ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि कुछ माह पूर्व ही उनके 19 वर्षीय छोटे पोते की नशे के ओवरडोज से मौत हो गई थी। नशे का इंजेक्शन हाथ में फंसा हुआ मिला था। बड़ा पोता राजस्थान के हनुमानगढ़ स्थित नशामुक्ति केंद्र में है। परिवार ने मेहनत-मजदूरी करके छोटे पोते के इलाज पर लगभग 4.50 लाख खर्च किए फिर भी उसे बचा नहीं सके।

रानियां के विधायक बोले

अर्जुन चौटाला का कहना है कि विधानसभा में बार-बार इस मुद्दे को उठाया है। सरकार से मांग है कि चिट्टा बेचने वालों, तस्करों और माफियाओं के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई हो, सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों को मजबूत किया जाए, प्रोटोकॉल फॉलो हो और जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटियां बनाई जाएं।
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