डेस्क। जब कोई नेता बिना सैलरी लिए देश की सबसे अमीर राजनीतिक पार्टी की जिम्मेदारी संभाले, तो सवाल अपने आप उठता है-आखिर उस पार्टी की ताकत क्या है ? बिहार की बांकीपुर सीट से विधायक नितिन नबीन 20 जनवरी से बीजेपी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। वे जीरो सैलरी पर काम करेंगे, लेकिन जिस संगठन को संभालेंगे, उसके खाते में 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हैं, और देश के 772 जिलों में अपनी जमीन और ऑफिस मौजूद हैं। करीब 18 करोड़ सदस्यों, मजबूत जमीनी कैडर और 20 राज्यों में सरकार के साथ BJP आज सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि एक संगठित राजनीतिक मशीन बन चुकी है।
BJP इतनी अमीर कैसे बनी? 10,107 करोड़ रुपये का सच क्या है?
दिसंबर 2025 में कांग्रेस नेता अजय माकन ने राज्यसभा में दावा किया कि BJP के बैंक अकाउंट में 10,107 करोड़ रुपये हैं। यह रकम कांग्रेस से करीब 75 गुना ज्यादा है। चुनाव आयोग और ADR के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 2023-24 में BJP की घोषित आय 4,340 करोड़ रुपये रही, जो सभी राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय का 74% है। यह पैसा सिर्फ चुनाव में नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करने में भी लगाया गया।
हर जिले में BJP का अपना ऑफिस क्यों है? इसके पीछे की रणनीति क्या है?
2014 से पहले BJP के पास सिर्फ 200 स्थायी जिला कार्यालय थे। चुनाव प्रचार के समय पार्टी को स्कूल, मंदिर या किसी कार्यकर्ता के घर कार्यक्रम करने पड़ते थे। 2014 के बाद, तब के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने फैसला किया कि पार्टी का हर जिले में अपना ऑफिस होगा, वह भी पार्टी की अपनी जमीन पर।
BJP कितनी अमीर पार्टी है?
BJP दुनिया की सबसे बड़ी और अमीर पार्टी मानी जाती है। दिसंबर 2025 में कांग्रेस नेता अजय माकन ने राज्यसभा में कहा कि BJP के पास 10,107 करोड़ रुपये हैं, जो कांग्रेस के मुकाबले लगभग 75 गुना ज्यादा है।
@ सदस्य संख्या: 18 करोड़ प्राथमिक सदस्य और 2 करोड़ सक्रिय सदस्य
@ देशभर में ऑफिस: 772 जिलों में पार्टी की जमीन और ऑफिस
@ वित्तीय मॉडल: खर्च निकालने के लिए एफडी सिस्टम, महीने का ऑफिस खर्च 60 हजार रुपये
@ कमाई: 2013-14 में 674 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 4,340 करोड़ रुपये
नितिन नबीन की नई जिम्मेदारी: सैलरी नहीं, लेकिन चुनौतियां बहुत
नितिन नबीन को पार्टी की कमान संभालने के लिए सैलरी नहीं मिलेगी, लेकिन उन्हें देश के हर जिले में फैले संगठन और चुनाव की रणनीति को बनाए रखना होगा। BJP ने पिछले सालों में हर जिले में स्थायी डिस्ट्रिक्ट ऑफिस स्थापित किए हैं।
BJP आफिस में मिलेंगी क्या-क्या सुविधाएं?
@ ऑफिस की सुविधाएं: लंबा-चौड़ा हॉल, पैंट्री, गेस्ट रूम, लाइब्रेरी, कॉन्फ्रेंस हॉल, सोशल मीडिया वॉर रूम
@ प्रबंधन: ऑफिस के लिए बजट 1.5 से 2.5 करोड़, स्टेट ऑफिस के लिए 3 से 5 करोड़
@ सैलरी स्ट्रक्चर: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महामंत्री को सैलरी नहीं, केवल ऑफिस संचालन के लिए कर्मचारी
साउथ दिल्ली के BJP डिस्ट्रिक्ट ऑफिस का उदाहरण लें।
@ बेसमेंट वॉर रूम: 100 लोग सोशल मीडिया और चुनाव अभियान संभाल सकते हैं
@ कॉन्फ्रेंस हॉल: 20-25 लोगों की बैठने की क्षमता, प्रोग्राम के लिए इस्तेमाल
@ गेस्ट रूम: दूसरे राज्यों से आए कार्यकर्ताओं के लिए सुविधा
यह मॉडल सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। BJP ने 2014 के बाद हर जिले में ऑफिस बनाने का अभियान शुरू किया। अब 386 नए ऑफिस तैयार हो चुके हैं और 170 पुराने ऑफिसों का रेनोवेशन हो चुका है।
एक ऑफिस का खर्च कैसे चलता है? FD सिस्टम क्या है?
BJP ने हर जिला ऑफिस के लिए एक अनोखा मॉडल बनाया है। हर ऑफिस का मासिक खर्च करीब 60 हजार रुपये तय है। इसके लिए पार्टी ने एक करोड़ रुपये की FD का प्रस्ताव रखा है, ताकि ब्याज से खर्च निकलता रहे।
@ एफडी फंड: जिले के कारोबारियों से डोनेशन
@ ब्याज का उपयोग: महीने का खर्च और कार्यक्रम संचालन।
@ अन्य योगदान: छोटे व्यापारी बिजली का बिल या ऑफिस के उपकरण स्पॉन्सर करते हैं।
इस मॉडल के जरिए BJP अपने ऑफिसों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की योजना बना रही है।
FD का पैसा कहां से आता है?
@ स्थानीय कारोबारियों के डोनेशन से।
@ पार्टी कार्यक्रमों की स्पॉन्सरशिप से।
@ 100 रुपये की सदस्यता फीस से। इससे हर जिला इकाई आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही है।
बीजेपी बनाम कांग्रेस: जमीन और संपत्ति की तुलना
CNG और ऑफिस की स्थिति में कांग्रेस अभी भी कमजोर है। कई जिलों में बंद या निष्क्रिय ऑफिस हैं। जमीन-बिल्डिंग रिकॉर्ड अधूरा है।
@ गुजरात में हाईकमान ने जिलों की लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया।
@ कांग्रेस के पास स्थायी ऑफिसों की संख्या BJP के मुकाबले बहुत कम।
@ BJP के 772 जिलों के ऑफिसों के मुकाबले कांग्रेस के कई ऑफिस पुराने और अप्रचलित।
नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
2026-27 में कई बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं- उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, पंजाब, तमिलनाडु, केरल जैसे राज्य BJP के लिए अग्निपरीक्षा होंगे। ऐसे समय में नितिन नबीन को सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि इस विशाल संगठन को एक दिशा में चलाए रखना होगा।