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बंगाल में भाजपा का चढ़ता ग्राफ ! पार्टी टीएमसी के 5% वोटर खिसके, तो राज्य में बीजेपी की सत्ता पक्की, समझे पूरा गणित

डेस्क। पश्चिम बंगाल में इस समय विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी पारा चरम पर है। यहां कुल 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल 2026 को होने हैं। 4 मई 2026 को वोटों की. . .

डेस्क। पश्चिम बंगाल में इस समय विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी पारा चरम पर है। यहां कुल 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल 2026 को होने हैं। 4 मई 2026 को वोटों की गिनती होगी और नतीजे भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे। इस विधानसभा चुनाव में वैसे तो कई पार्टियां अपनी किस्मत आजमा रही हैं लेकिन मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जानता पार्टी (BJP) के बीच है। ममता बनर्जी जहां चौथी बार लगातार मुख्यमंत्री बनना चाह रही हैं, तो वहीं बीजेपी हर हाल में बंगाल की सत्ता पर काबिज होना चाह रही है.

5% वोट स्विंग से बंगाल में पलट जाएगा पासा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद कहा था कि अब बंगाल से ‘जंगल राज’ को खत्म करना है। बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली विधानसभा की जीत ने बीजेपी को नया जोश दिया है। अब बीजेपी हर हार में बंगाल की सत्ता पर काबिज होना चाह रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का सिर्फ 5% वोट बीजेपी के पाले में गया तो बंगाल में भाजपा की सत्ता पक्की है। ममता बनर्जी के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए जी तोड़ कोशिश बीजेपी कर रही है। दरअसल, विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी को 38.1% वोट मिले थे, जिससे वह 77 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही थी। उधर, TMC को 48 प्रतिशत वोट के साथ 215 सीटों पर जीत मिली थी। विधानसभा चुनाव 2021 में बीजेपी 38 सीटें सिर्फ 5 प्रतिशत के मार्जिन से हारी थीं और 75 सीटें 10% के मार्जिन से हारी थीं। ऐसे में विधानसभा चुनाव 2026 में यदि बीजेपी TMC के सिर्फ 5 प्रतिशत वोट भी अपने पाले में कर लेती है तो वह 10 प्रतिशत के मार्जिन से हारी सीटें जीत सकती है। ऐसे में बीजेपी की जीतीं कुल सीटें 75+77 यानी 152 हो जाएंगी। पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए। राजनीति के जानकारों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी को बंगाल की सत्ता में आने के लिए 40-42% से अधिक वोट की जरूरत होगी, ताकि वह टीएमसी के वोट प्रतिशत को पीछे छोड़ सके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 5 से 6 फीसदी का वोट स्विंग आसान नहीं होता। आम तौर पर सत्ता बदलाव की स्थिति में 2 से 3 फीसद वोटों का अंतर आता है। उधर, भाजपा के रणनीतिकारों के मुताबिक जब बदलाव की स्थिति बनती है तब पुराने आंकड़े ज्यादा मायने नहीं रखते हैं।


सीटों के लिहाज से स्थिति

सीटों के लिहाज से देखें तो भाजपा को अभी भी अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। 2014 में पार्टी ने 2 लोकसभा सीटें जीती थीं, जो 2019 में बढ़कर 18 हो गईं, लेकिन 2024 में यह संख्या घटकर 12 रह गई। यानी वोट प्रतिशत में मजबूती के बावजूद सीटों में गिरावट दर्ज की गई। यही स्थिति विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिली। 2021 के चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीतकर बड़ी बढ़त हासिल की, लेकिन 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी।

राज्य की स्थिति और प्रभाव

राज्य के भीतर क्षेत्रीय संतुलन भी भाजपा के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है। उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे इलाकों में पार्टी की पकड़ मजबूत मानी जाती है, लेकिन दक्षिण बंगाल जहां विधानसभा की सबसे अधिक सीटें हैं वहां तृणमूल का दबदबा कायम है। जब तक भाजपा इस क्षेत्रीय असंतुलन को दूर नहीं करती, तब तक बहुमत हासिल करना मुश्किल बना रहेगा।

2026 विधानसभा चुनाव की स्थिति

आगामी 2026 विधानसभा चुनाव के संदर्भ में यदि 2024 के वोट प्रतिशत को आधार माना जाए, तो भाजपा को सत्ता के करीब पहुंचने के लिए कम से कम 5 से 7 प्रतिशत अतिरिक्त वोट स्विंग की जरूरत होगी। इसके साथ ही बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, स्थानीय नेतृत्व को उभारना और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े मुद्दों पर पकड़ बनाना भी जरूरी होगा।
इसके बावजूद भाजपा के लिए अवसर भी कम नहीं हैं। राज्य में लंबे समय से सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ संभावित एंटी-इंकंबेंसी, भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दे और केंद्र की योजनाओं का प्रभाव पार्टी के पक्ष में माहौल बना सकते हैं। यदि भाजपा इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में सफल रहती है, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

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