नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रक्षा क्षेत्र में बड़ी रणनीतिक साझेदारी का इरादा जताया है। इसको लेकर सोमवार को दोनों देशों के बीच लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) पर दस्तखत हुए हैं। भारत और यूएई के बीच इस तरह का समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिसकी वजह से जियोपॉलिटिक्स में बहुत ही ज्यादा उथल-पुथल मचा हुआ है। दोनों देश इस तरह समझौते की ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई बातचीत के बाद बढ़े हैं। दोनों देश ने रक्षा क्षेत्र में जिस तरह से तालमेल का इरादा जताया है, उससे पाकिस्तान का मुस्लिम देशों के बीच भी घिरना तय है।
भारत-यूएई में रणनीतिक रक्षा साझीदारी
भारत और यूएई के बीच रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझीदारी को लेकर लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच सीधी बात हुई, जिसके बाद ही इसका रास्ता साफ हो सका है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित डिफेंस पार्टनरशिप एग्रीमेंट में जो बातें शामिल की गई हैं, उससे भारत और खाड़ी के एक मुस्लिम देश की निकटता और उसकी गहराई की झलक मिलती है और यह निश्चित पर पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देश के लिए बहुत ही बड़ा कूटनीतिक झटका है।
रक्षा क्षेत्र में विस्तार से काम करेंगे दोनों देश
भारत-यूएई में प्रस्तावित रणनीतिक रक्षा साझेदारी के तहत दोनों देश रक्षा उद्योग के क्षेत्र में आपसी तालमेल बढ़ाएंगे, जिसमें इनोवेशन एंड एडवांस टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग एंड एजुकेशन, स्पेशल ऑपरेशन, साइबरस्पेस और आतंकवाद विरोधी अभियान शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि भारत और यूएई के बीच अभी भी रक्षा संबंध बने हुए हैं और वही नए समझौते का भी अधार बना है।
भारत-यूएई साझेदारी, पाकिस्तान को झटका
भारत और संयुक्त अरब अमीरात ऐसे समय में बहुत बड़े डिफेंस डील की ओर बढ़े हैं, जब पाकिस्तान ने सऊदी अरब से रक्षा समझौता किया है और यमन पर प्रभुत्व को लेकर यूएई के साथ सऊदी अरब के बीच तनाव चल रहा है। ऐसे वक्त में दोनों देशों का इस तरह के करार में शामिल होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि, पाकिस्तान मुस्लिम देशों से इसलिए तालमेल बढ़ा रहा है, ताकि वह अपने भारत-विरोधी मुहिम को मजबूती से हवा दे सके।
पाकिस्तान के खिलाफ मुस्लिम देश का साथ
पीएम मोदी और शेख अल नाहयान ने आपसी बातचीत में एक-दूसरे के देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और रणनीतिक स्वायत्ता को सम्मान देने की बात कही है। वहीं आतंकवाद, सीमा-पार से प्रायोजित आतंकवाद पर सीधा प्रहार और यह कहकर कि किसी भी देश को आतंकवादियों को वित्तीय मदद देने वालों या आतंकी मॉड्यूल को पनाह नहीं देना चाहिए, पाकिस्तान को सीधा संदेश दिया है। यही नहीं, दोनों देश टेरर फाइनेंसिंग रोकने के लिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के तहत आपसी सहयोग पर भी सहमत हुए हैं। इसके साथ ही दोनों देशों ने मनी-लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कोशिशों में मजबूती लाने पर सहमति जताकर भी पाकिस्तान की लंका लगाने का इरादा जता दिया है।