अहमदाबाद। ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध की वजह से दुनियाभर में गैस और तेल का संकट पैदा हो गया है। भारत में भी एलपीजी संकट गंभीर होता जा रहा है। कमर्शियल सिलेंडरों की कमी की वजह से डोमेस्टिक सिलेंडरों की डिमांड बढ़ रही है, लेकिन उसकी भी कमी देखने को मिल रही है। सरकार ने कहा है कि चिंता की कोई बात नहीं है। हालांकि इसके बावजूद देश के कई शहरों में एलपीजी संकट का असर दिख रहा है। इस संकट के बीच आज भारत में एलपीजी से लदा जहाज आ गया है
मंगलुरु बंदरगाह पहुंचा जहाज
रविवार की सुबह अमेरिका के टेक्सास से निकला एलपीजी कार्गो जहाज ‘पिक्सिस पायनियर’ सुरक्षित रूप से मंगलुरु बंदरगाह पहुंच गया है। ईरान की धमकियों और समुद्र में फंसे सैकड़ों जहाजों के बीच भारत की यह दमदार कूटनीति दिखाती है कि सरकार ने वक्त रहते वैकल्पिक रास्तों और नए साझेदारों पर काम शुरू कर दिया था. ताकि देश के घरों में चूल्हे ठंडे न पड़ें।
बैक-टू-बैक आएंगे तीन बड़े जहाज
मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचा यह जहाज तो बस शुरुआत है। आने वाले हफ्ते में दो और बड़े एलपीजी जहाज भारत पहुंचने वाले हैं. 25 मार्च को ‘अपोलो ओसियन’ करीब 26,687 टन गैस लेकर आएगा। जो इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम की जरूरतों को पूरा करेगा। इसके ठीक बाद 29 मार्च को एक और जहाज 30,000 टन गैस लेकर एचपीसीएल के लिए पहुंचेगा। यानी इस एक हफ्ते के भीतर अकेले मंगलुरु में 72,700 टन से ज्यादा रसोई गैस की आवक होगी. यह गैस केवल मंगलुरु के लिए नहीं है, बल्कि एचपीसीएल की पाइपलाइन के जरिए इसे बेंगलुरु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों तक भेजा जाएगा. जिससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी।