डेस्क। दुनियाभर में टाइप-2 डायबिटीज के लिए सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली दवा ‘मेटफॉर्मिन’ को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। सालों से हम यही जानते थे कि यह दवा हमारे लीवर, आंतों या पैंक्रियाज पर काम करके ब्लड शुगर कंट्रोल करती है, लेकिन साइंटिफिक एडवांसेज में छपी एक नई रिसर्च ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। पता चला है कि यह दवा सीधे हमारे दिमाग के उस हिस्से (हाइपोथैलेमस) पर असर डालती है, जो शरीर की ऊर्जा और शुगर लेवल को कंट्रोल करता है।
दिमाग के साथ मेटफॉर्मिन का यह नया कनेक्शन क्या है?
इस शोध में पाया गया कि मेटफॉर्मिन दिमाग के भीतर ‘Rap1’ नाम के एक प्रोटीन को दबा देती है और कुछ खास नसों (SF1 न्यूरॉन्स) को एक्टिव कर देती है। चौंकाने वाली बात यह है कि अगर इस दवा की बहुत मामूली खुराक भी सीधे दिमाग तक पहुंचे, तो यह ब्लड शुगर को तेजी से कम कर सकती है। इसका मतलब है कि यह दवा सिर्फ पेट के रास्ते काम नहीं करती, बल्कि हमारे नर्वस सिस्टम के जरिए भी शरीर को कंट्रोल करती है।
क्या यह खतरे की घंटी है? विशेषज्ञों की चिंता और शोध
जहां एक तरफ यह खोज इलाज के नए दरवाजे खोलती है, वहीं दूसरी तरफ इसने कुछ गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। वैज्ञानिकों को डर है कि दिमाग के रास्तों में बदलाव करने से हमारी सोचने-समझने की शक्ति (Cognition) पर असर पड़ सकता है। जानवरों पर हुए कुछ टेस्ट में देखा गया कि लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से याददाश्त और सीखने की क्षमता में कमी आई। वहीं इंसानों पर इसके नतीजे मिले-जुले रहे हैं; जहां कुछ स्टडीज कहती हैं कि यह बुढ़ापे में याददाश्त खोने (डिमेंशिया) से बचाती है, वहीं कुछ का मानना है कि लंबे समय तक इस्तेमाल से मानसिक प्रदर्शन गिर सकता है।
सावधानियां और शरीर पर अन्य प्रभाव
मेटफॉर्मिन के पुराने और जाने-माने साइड इफेक्ट्स आज भी बरकरार हैं। लगभग 75% मरीजों को शुरुआत में दस्त, मतली या पेट में बेचैनी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, लंबे समय तक इसके सेवन से शरीर में ‘विटामिन B12’ की कमी हो सकती है, जिससे नसों में कमजोरी और खून की कमी का खतरा रहता है। एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति ‘लैक्टिक एसिडोसिस’ भी हो सकती है, जो खासकर किडनी या लीवर के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
मरीजों को अब क्या करना चाहिए?
इस नई रिसर्च का मतलब यह कतई नहीं है कि आप अपनी दवा बंद कर दें। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैनिक होने की जरूरत नहीं है क्योंकि मेटफॉर्मिन अभी भी सबसे सुरक्षित दवाओं में से एक है। बस अब जरूरत है थोड़ी ज्यादा सावधानी की। अगर आप लंबे समय से यह दवा ले रहे हैं, तो समय-समय पर अपनी किडनी की जांच कराएं, विटामिन B12 का लेवल चेक करवाते रहें और अगर आपको जरूरत से ज्यादा थकान या याददाश्त में धुंधलापन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से बात करें। याद रखें, बिना डॉक्टरी सलाह के दवा में बदलाव करना इस शोध के किसी भी फायदे से ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है।