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होर्मुज संकट पर 60 से अधिक देशों के बीच हुईं हाई लेवल मीटिंग, भारत का रुख साफ, कहा- होर्मुज में सुरक्षित ट्रांजिट जरूरी, कूटनीति से ही निकलेगा रास्ता

डेस्क। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट को लेकर ब्रिटेन के साथ 60 देशों की बैठक हुई। इसमें भारत की तरफ से विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भाग लिया। उन्होंने इन सभी देशों के सामने भारत का पक्ष क्लियर कर दिया। वहीं,. . .

डेस्क। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट को लेकर ब्रिटेन के साथ 60 देशों की बैठक हुई। इसमें भारत की तरफ से विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भाग लिया। उन्होंने इन सभी देशों के सामने भारत का पक्ष क्लियर कर दिया। वहीं, भारत ने ब्रिटेन समेत 35 देशों द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त बयान का समर्थन नहीं किया।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री

नई दिल्ली: ईरान संकट को लेकर भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को ब्रिटेन द्वारा आयोजित एक बैठक में भाग लिया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा के प्रयासों पर चर्चा हुई। बैठक में 60 से अधिक देशों ने भाग लिया और महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग से आवागमन की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए सैन्य उपायों के बजाय राजनयिक और राजनीतिक उपायों पर चर्चा की।
बैठक में विक्रम मिस्री ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से निर्बाध आवागमन और आवागमन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के महत्व पर जोर दिया। सरकार ने कहा कि उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव और इस तथ्य पर भी बल दिया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है।

संकट से बाहर निकलने का एक मात्र रास्ता

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और सभी संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटना है। बता दें कि ब्रिटेन में हुई यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उस बयान के बाद हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने की जिम्मेदारी उन एशियाई और यूरोपीय देशों को उठानी चाहिए। बताया गया है कि वाशिंगटन ने ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई आभासी बैठक में भाग नहीं लिया।

भारत सीधी बातचीत का समर्थक

@हालांकि, भारत ने अभी तक ब्रिटेन और 35 अन्य देशों द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त बयान का समर्थन नहीं किया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देने की तत्परता व्यक्त की गई है।
@भारत इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तेहरान के साथ सीधी बातचीत का समर्थन करता है, जैसा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले कहा था, इससे कुछ परिणाम निकले हैं। ईरान ने अब तक भारतीय ध्वज वाले 6 जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्या है?

@ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग 167 किलोमीटर लंबा है और सबसे संकरे स्थान पर इसकी चौड़ाई केवल 33 किलोमीटर है।
@सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देश भारत, चीन और पाकिस्तान समेत कई देशों के लिए कच्चे तेल और गैस का निर्यात इसी रास्ते से करते हैं।
@यह फारस की खाड़ी से खुले महासागर तक एकमात्र समुद्री रास्ता है, कई देशों के जहाज इस होकर गुजरते हैं।
@चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देश इस मार्ग से आने वाले तेल पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
@इस क्षेत्र में ईरान की ओर से अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकियां मिलती रही हैं, जो इसे भू-राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बनाती हैं।

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