पटना। बिहार के पटना से एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाली राशि को हड़पने के लिए 6 महिलाओं की बच्चेदानी (Uterus) ही निकाल ली, जबकि उन्हें भर्ती हार्निया और बवासीर के इलाज के लिए किया गया था।
जानें कैसा हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
मामले का खुलासा तब हुआ जब ऑपरेशन के बाद 30 से 38 वर्ष की उम्र वाली इन महिलाओं का मासिक धर्म बंद हो गया। घबराहट में जब पीड़ितों ने दूसरे केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराया, तो पता चला कि उनके शरीर से बच्चेदानी गायब है। जांच में सामने आया है कि अस्पताल ने कथित तौर पर फर्जी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट तैयार की थी ताकि ऑपरेशन को जायज ठहराया जा सके।
बवासीर और हार्निया के इलाज के नाम पर बड़ा धोखा
केस 1: अनिता देवी को 10 अक्टूबर 2025 को हार्निया के इलाज के लिए भर्ती किया गया था, लेकिन बिना परिजनों की अनुमति के उनकी बच्चेदानी निकाल ली गई।
केस 2: पूनम देवी को बवासीर (Piles) की समस्या बताई गई थी, लेकिन ऑपरेशन के नाम पर उनके साथ भी यही भयानक खेल खेला गया। पीड़ित महिलाओं को अपने साथ हुए धोखे की जानकारी तब हुई जब उन्हें मासिक धर्म आना बंद हो गया और दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों से जांच करवाई।
अजीबोगरीब मामला: हद तो तब हो गई जब अस्पताल प्रबंधन ने रिकॉर्ड में एक जीवित महिला को ही ‘मृत’ घोषित कर दिया, जो बाद में खुद जांच टीम के सामने पेश हुई।
जांच रिपोर्ट में क्या निकला?
पटना सिविल सर्जन की जांच रिपोर्ट में अस्पताल को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डायग्नोस्टिक सेंटर्स ने पुष्टि की है कि मूल रिपोर्ट में बच्चेदानी बिल्कुल स्वस्थ थी, जिसे अस्पताल ने बाद में मन मुताबिक बदल दिया। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन इन आरोपों को नकार रहा है और दावों को निराधार बता रहा है।