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अन्ना हजारे का ‘अंतिम’ महासंग्राम ! इस मांग को लेकर शुरू किया आमरण अनशन, सरकार को दी खुली चुनौती

रालेगणसिद्धी। भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की आवाज बन चुके वयोवृद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के पवित्र अवसर पर अन्ना ने शुक्रवार से अपने पैतृक गांव. . .

रालेगणसिद्धी। भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की आवाज बन चुके वयोवृद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के पवित्र अवसर पर अन्ना ने शुक्रवार से अपने पैतृक गांव रालेगणसिद्धी में ‘आमरण अनशन’ का शंखनाद कर दिया।
अन्ना ने इस बार के तेवरों से साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अब आर-पार की है। उन्होंने इस आंदोलन को अपना ‘अंतिम संघर्ष’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि जब तक लोकायुक्त कानून जमीन पर नहीं उतरता, वे अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म नहीं करेंगे।

सरकार सिर्फ दिखावा कर रही है

अनशन शुरू करने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए अन्ना हजारे का दर्द और आक्रोश साफ झलका। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, ‘सरकार सिर्फ फाइलों और वादों का दिखावा कर रही है। यदि सरकार वाकई ईमानदार है और उसे भ्रष्टाचार मिटाने की चिंता है, तो वह लोकायुक्त कानून से डर क्यों रही है? अन्ना ने स्पष्ट किया कि जनहित के लिए यह कानून अनिवार्य है और अब वे सरकार के किसी भी खोखले आश्वासन के झांसे में नहीं आएंगे।

तीन साल का लंबा इंतजार और ‘टूटा’

  • भरोसा अन्ना हजारे ने याद दिलाया कि यह मांग नई नहीं है। लोकायुक्त कानून का मुद्दा पिछले तीन वर्षों से अधर में लटका हुआ है:
  • 2022 का अनशन: उस समय देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्रियों के हस्तक्षेप के बाद अन्ना ने इस भरोसे पर अनशन तोड़ा था कि कानून जल्द आएगा।
  • मंजूरी के बाद भी देरी : विधानसभा और विधान परिषद से मसौदा पारित होने और राष्ट्रपति तक पहुंचने के बावजूद, तीन साल बीत गए लेकिन कानून लागू नहीं हुआ।
  • समिति की अनदेखी: सरकार द्वारा बनाई गई समिति के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

फडणवीस सरकार के खिलाफ कड़े तेवर

महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति के बीच अन्ना का यह कदम सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। अन्ना ने कहा कि पिछली बार सरकार ने समिति गठित कर मामला शांत करा दिया था, लेकिन इस बार ‘कमेटी-कमेटी’ का खेल नहीं चलेगा। उनके कड़े तेवर बता रहे हैं कि 80 से अधिक की उम्र के बावजूद उनका जज्बा आज भी 2011 के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ वाले अन्ना जैसा ही है।

अन्ना हजारे की अंतिम चेतावनी

रालेगणसिद्धी के यादवबाबा मंदिर परिसर में शुरू हुआ यह अनशन केवल एक व्यक्ति की जिद नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता की उम्मीदों का केंद्र बन गया है। अन्ना ने साफ लहजे में कहा, ‘यह जनहित का आंदोलन है। जब तक कानून लागू होने का आधिकारिक नोटिफिकेशन नहीं आता, मेरा अनशन जारी रहेगा। अब कदम पीछे नहीं हटेंगे।’

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