मुजफ्फरपुर। “अभी मैं मरा नहीं हूं, साहब! मैं जिंदा हूं और आपके सामने खड़ा हूं.” बिहार के सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता के कारण आज बुजुर्गों को यही गुहार लगानी पड़ रही है। मामला मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड का है, जहां सरकारी कागजों में एक जिंदा इंसान को ‘मुर्दा’ घोषित कर दिया गया है।अपनी वृद्धा पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे इन बुजुर्गों की बेबसी यह बताने के लिए काफी है कि यहां का प्रशासनिक तंत्र कितना लापरवाह हो चुका है।
सरकारी लापरवाही का नया केंद्र
बिहार में सरकारी कर्मियों की लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। अभी कुछ ही दिन पहले कुढ़नी प्रखंड से ऐसा ही एक कारनामा सामने आया था, जहां कई जिंदा लोगों को मृत दिखाकर उनकी पेंशन रोक दी गई थी। अब ठीक वैसी ही तस्वीर सकरा प्रखंड के रामपुर कृष्णा पंचायत अंतर्गत हरिपुर कृष्णा गांव से आई है. यहां के कई बुजुर्गों को विभाग की ओर से कागजों पर मृत घोषित कर दिया गया है। इस लापरवाही ने न केवल इन बुजुर्गों की आर्थिक मदद रोक दी है, बल्कि उन्हें एक मानसिक पीड़ा के दौर में भी धकेल दिया है।
बैंक पहुंचे तो पता चला कि हो गई मौत
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब गांव के रामदेव राम और आनंदी दास जैसे बुजुर्ग अपनी पेंशन निकालने बैंक पहुंचे। महीनों का इंतजार खत्म होने की उम्मीद में जब वे काउंटर पर खड़े हुए, तो बैंक कर्मियों ने जो कहा उसे सुनकर वे सन्न रह गए. बैंक कर्मियों ने उन्हें साफ बता दिया कि विभाग की ओर से उन्हें ‘मृत’ घोषित किया जा चुका है और इसी वजह से उनकी वृद्धा पेंशन की फाइल हमेशा के लिए बंद कर दी गई है। जो बुजुर्ग अपनी जरूरतों के लिए इसी छोटी सी राशि पर निर्भर थे, उनके लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं थी।
खुद के वजूद को साबित करने की जंग
पीड़ित बुजुर्ग रामदेव राम और आनंदी दास ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि उन्हें कभी सपने में भी नहीं लगा था कि सरकारी दफ्तर के बाबू उन्हें जीते-जी मार देंगे। उन्होंने कहा, “हम गरीब लोग हैं, सरकार की इसी पेंशन से हमारा थोड़ा सहारा होता था, लेकिन अब हमें खुद के जिंदा होने का प्रमाण पत्र लेकर यहां-वहां घूमना पड़ रहा है।” सरकारी तंत्र की इस भारी चूक की वजह से अब ये बुजुर्ग ब्लॉक और पंचायत के चक्कर काटने को मजबूर हैं, ताकि वे कागजों में दोबारा ‘जिंदा’ हो सकें और उनकी रुकी हुई पेंशन फिर से शुरू हो सके।