देहरादून। उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड को खत्म करने का फैसला लिया है। मदरसा बोर्ड खत्म करने के बाद सरकार इसके स्थान पर एक नई अथॉरिटी लाने जा रही है। धामी सरकार ने राज्यपाल की मंजूरी के बाद राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया है। सरकार की ओर से इस प्राधिकरण के गठन से संबंधित अधिसूचना मंगलवार को जारी कर दी गई। अधिसूचना के अनुसार, प्राधिकरण में अध्यक्ष सहित कुल 11 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। रुड़की के बीएसएम पीजी कॉलेज के रिटायर्ड प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है। प्राधिकरण अब अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों सूरत को तय करेगा।
क्या होगा प्राधिकरण का कार्य?
उत्तराखंड सरकार के विशेष सचिव डॉ.पराग मधुकर धकाते ने कहा कि पिछले विधानसभा सत्र में मदरसा बोर्ड खत्म करने का विधेयक पास किया गया था। अब मदरसा संस्थानों के लिए नया उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है। राज्यपाल के निर्देश के आधार पर इसका गठन किया गया है। यह प्राधिकरण मुख्य रूप से मदरसा संस्थानों संचालित करेगा। साथ ही, शिक्षा के स्वरूप और सिलेबस के प्रारूप भी प्राधिकरण की ओर से तय किए जाएंगे।
कब से प्रभाव में आएगा प्राधिकरण?
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को लाया जाएगा। इन संस्थानों की मान्यता उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की ओर से दी जाएगी। डॉ.पराग मधुकर धकाते के अनुसार, एक जुलाई 2026 से नया प्राधिकरण अस्तित्व में आ जाएगा।
बोर्ड में कौन-कौन हैं शामिल?
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बोर्ड का गठन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर किया गया है। राज्यपाल की अनुमति के बाद इसकी अधिसूचना 3 फरवरी को जारी कर दी गई। प्राधिकरण बोर्ड में डॉ.सुरजीत सिंह गांधी अध्यक्ष बनाए गए हैं। वहीं, प्रो. राकेश जैन, डॉ.सैयद अली, प्रो. पेमा तेनजिन, डॉ.एल्बा मेड्रिले, प्रो. रोबिना अमन, प्रो. गुरमीत सिंह, राजेंद्र बिष्ट और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी चंद्रशेखर भट्ट को सदस्य बनाया गया है।
इसके साथ ही महानिदेशक-विद्यालयी शिक्षा, निदेशक-राज्य शैक्षिक अनुसंधान और निदेशक-अल्पसंख्यक कल्याण भी प्राधिकरण में सदस्य होंगे। यह बोर्ड अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों के सिलेबस भी तय करेगा।
सीएम धामी ने बताई खासियत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्राधिकरण के गठन को लेकर कहा कि अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण तय करेगा कि अल्पसंख्यक बच्चों को कैसी शिक्षा दी जाएगी। मदरसा बोर्ड को खत्म करने के सरकार के पिछले कदम के बाद प्राधिकरण के गठन का फैसला लिया गया है।
सीएम धामी ने कहा कि अब यह प्राधिकरण अल्पसंख्यक बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा का स्वरूप तय करेगा और सिलेबस को अंतिम रूप देगा। सभी अल्पसंख्यक संस्थानों को उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से मान्यता लेनी होगी।