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राज्यसभा चुनाव का फाइनल स्कोरकार्ड : NDA ने 22 सीटें जीतीं, कांग्रेस- 6, जानिए किसे नफा-नुकसान

नई दिल्ली। सोमवार को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव नतीजे सामने आए, जिससे NDA ने 22 सीटों पर जीत हासिल की। इस चुनाव में NDA को 10 सीटों का फायदा और विपक्ष को 10 सीटों का नुकसान. . .

नई दिल्ली। सोमवार को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव नतीजे सामने आए, जिससे NDA ने 22 सीटों पर जीत हासिल की। इस चुनाव में NDA को 10 सीटों का फायदा और विपक्ष को 10 सीटों का नुकसान हुआ। पहले NDA के पास 12 सीटें थीं, जबकि विपक्ष के पास 25 सीटें थीं। कुल 37 सीटों में से 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए, लेकिन हरियाणा, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में मतदान ने सभी को चौंका दिया।

हरियाणा और क्रॉस वोटिंग का खेल

हरियाणा में 2 सीटों के लिए हुए चुनाव से लाखों लोगों की नजरें टिकी थीं। वोटिंग के बाद बीजेपी के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने जीत हासिल की। अन्य निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में 90 विधायकों के वोट थे, जिनमें से कुछ ने क्रॉस वोटिंग की और दो विधायकों ने वोट नहीं डाला। जिससे कर्मवीर बौद्ध की जीत सुनिश्चित हो गई।

बिहार की हार्स ट्रेडिंग में NDA की जीत

बिहार में NDA ने महागठबंधन को मात देकर सभी 5 सीटें जीतीं। RJD के एडी सिंह मतदान में 41 वोट की दावेदारी कर रहे थे, लेकिन उनके 4 विधायकों के मतदान में शामिल न होने से उनका वोट सिर्फ 37 रह गया। इससे NDA को एक अतिरिक्त सीट मिली। इस बार बिहार की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिली।

ओडिशा में BJP की सफलताएँ

ओडिशा में BJP ने 2 सीटें जीतकर एक बार फिर साबित किया कि उनकी स्थिति मजबूत है। भाजपा के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार ने जीत दर्ज की, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने भी विजय प्राप्त की। BJD की हिस्सेदारी एक सीट तक सीमित रही, जिससे विपक्षी दलों में आपसी मतभेदों और खींचतान के संकेत मिलते हैं।

वोटिंग विवाद और सुरक्षा के सवाल

हरियाणा में वोटिंग के दौरान कुछ तकनीकी और गोपनीयता के मुद्दे भी उठे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी द्वारा कुछ विधायकों के वोट की गोपनीयता भंग की गई। इस पर केंद्रीय चुनाव आयोग को हस्तक्षेप करने के लिए पत्र लिखा गया। इस चुनाव से पहले कई राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।

छोटी-छोटी जीत का माहौल

इस चुनाव के नतीजे ने एक बार फिर बता दिया कि भारतीय राजनीति में छोटे दलों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। चुनाव के आयोजन में जो कुछ भी हुआ, उससे सभी दलों को यह समझ में आया कि उन्हें अपनी रणनीतियों पर ध्यान देने की ज़रूरत है। चुनावी नतीजे राजनीतिक खेल के नए अध्याय की शुरुआत कर रहे हैं।

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