असम में अब सड़क और जंगल आमने-सामने नहीं होंगे, बल्कि साथ-साथ चलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काजीरंगा नेशनल पार्क से होकर गुजरने वाले कालीबोर-नुमालीगढ़ कॉरिडोर की आधारशिला रखकर देश को एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल दिया है, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक बनेंगे। करीब 6,957 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाईटेक हाईवे न केवल असम की कनेक्टिविटी बदलेगा, बल्कि हाथी, गैंडे और हिरण जैसे वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करेगा।
प्रोजेक्ट 85.67 किलोमीटर लंबा
करीब 85.67 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय राजमार्ग-715 का हिस्सा है, जो कालीबोर से नुमालीगढ़ तक फैला होगा। फिलहाल यह सड़क दो लेन की है और कई हिस्सों में इसकी चौड़ाई और डिजाइन सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते। बरसात के मौसम में जब काजीरंगा से वन्यजीव बाहर निकलते हैं, तो हाईवे पार करते वक्त हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या के समाधान के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है।
जानें इस कॉरिडोर की 5 खास बातें
- 34.5 किमी लंबा एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर
इस प्रोजेक्ट का सबसे अहम हिस्सा 34.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन है, जहां गाड़ियां ऊपर से गुजरेंगी और नीचे से वन्यजीव बिना किसी रुकावट के काजीरंगा से कार्बी आंगलॉन्ग हिल्स तक आ-जा सकेंगे।
- ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
जखलाबांधा और बोकाखत जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के आसपास 21 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड बाईपास बनाया जाएगा, जिससे स्थानीय ट्रैफिक और भारी वाहनों की भीड़ कम होगी।
- पर्यटन को मिलेगा बड़ा बूस्ट
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से काजीरंगा नेशनल पार्क तक पहुंच आसान होगी। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- उद्योग और रोजगार के नए अवसर
यह हाईवे नुमालीगढ़ जैसे औद्योगिक केंद्रों को जोड़ते हुए व्यापार और लॉजिस्टिक्स को गति देगा। प्रोजेक्ट के दौरान और बाद में युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके पैदा होंगे।
- रेलवे और एयरपोर्ट से बेहतर कनेक्शन
सड़क नगांव, जखलाबांधा और विश्वनाथ चार्ली जैसे रेलवे स्टेशनों और तेजपुर, जोरहाट जैसे एयरपोर्ट्स से जुड़कर माल और यात्रियों की आवाजाही को तेज बनाएगी।