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एसआईआर को लेकर काम के तनाव का बर्दास्त नहीं कर पा रहे हैं BLO , केरल और राजस्थान में की खुदकुशी, कोलकाता का भी एक BLO भर्ती

नई दिल्ली। केरल और राजस्थान में एसआईआर को लेकर काम के तनाव में दो बीएलओ के खुदकुशी की खबर है। खबरों के मुताबिक केरल के कन्नूर में एक सरकारी स्कूल में स्टाफ अनीश जॉर्ज (44) ने रविवार को फांसी लगाकर. . .

नई दिल्ली। केरल और राजस्थान में एसआईआर को लेकर काम के तनाव में दो बीएलओ के खुदकुशी की खबर है। खबरों के मुताबिक केरल के कन्नूर में एक सरकारी स्कूल में स्टाफ अनीश जॉर्ज (44) ने रविवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह चुनाव के लिए BLO बनाए गए थे। परिजन का आरोप है कि अनीश ने यह कदम SIR से जुड़ी काम की टेंशन के चलते उठाया।
दूसरी ओर, जयपुर में SIR कार्यक्रम से परेशान BLO ने ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। कालवाड़ के धर्मपुरा निवासी मुकेश कुमार जांगिड़ (48) सरकारी टीचर थे। उनकी जेब से मिले सुसाइड नोट में लिखा था कि अधिकारी काम का दबाव बनाकर परेशान कर रहे हैं और सस्पेंड करने की धमकी दे रहे हैं।
कोलकाता में भी एक BLO को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पत्नी ने कहा कि उन पर SIR का काम निपटाने का दबाव है।

12 राज्यों में अबतक 97.52% फॉर्म बांटने का काम पूरा

चुनाव आयोग ने रविवार को बताया कि नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 51 करोड़ मतदाताओं में से 49 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को SIR फॉर्म प्राप्त हो चुके हैं। यानी 50.99 करोड़ मतदाताओं में से 97.52% को आंशिक रूप से भरे हुए फॉर्म मिले हैं।
12 राज्यों में छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप शामिल हैं।
इनमें तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में 2026 में चुनाव होंगे। असम में SIR की घोषणा अलग से की जाएगी। SIR का दूसरा चरण 4 नवंबर से शुरू हुआ है जो 4 दिसंबर तक चलेगा।

केरल में आज काम का बॉयकॉट करेंगे BLO

कन्नूर में एक BLO की आत्महत्या के बाद राज्य भर में बूथ स्तर के अधिकारी काम का बहिष्कार करेंगे। विरोध कर रहे संगठनों ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया और आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के कारण बीएलओ भारी दबाव में हैं। केरल एनजीओ एसोसिएशन ने राज्य भर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय और कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च की भी घोषणा की।
एसोसिएशन का कहना है कि बीएलओ को 23 साल पहले पब्लिश हुई मतदाता सूची में संशोधन के लिए दिन-रात काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है।

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