डेस्क। भारत में सड़क पर वाहन चलाते समय अब केवल ड्राइविंग लाइसेंस और बीमा होना ही काफी नहीं है. प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की अनदेखी आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है. मोटर वाहन अधिनियम के सख्त नियमों के कारण, ये छोटा सा सर्टिफिकेट न होने पर आपको ₹10,000 का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है या जेल की हवा खानी पड़ सकती है.
सबसे महत्वपूर्ण और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला ये दस्तावेज महज ₹50 से ₹100 में बनता है और आपको ₹10,000 के भारी-भरकम जुर्माने और जेल की हवा खाने से बचा सकता है.
पीयूसी से जुड़ा जुर्माना और सजा
मोटर वाहन अधिनियम, 1993 की धारा 190(2) के तहत बिना वैध PUC प्रमाणपत्र के वाहन चलाना एक गंभीर दंडनीय अपराध है. नियम इतने सख्त हैं कि पहली बार पकड़े जाने पर ही आपसे ₹10,000 तक का जुर्माना वसूला जा सकता है. इतना ही नहीं, दोषी पाए जाने पर आपको 6 महीने तक के कारावास की सजा हो सकती है. साथ ही परिवहन विभाग आपका ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने के लिए निलंबित कर सकता है.
वाहन चलाते समय 4 अनिवार्य दस्तावेज
सुरक्षित और कानूनी रूप से ड्राइविंग करने के लिए आपके पास ये चार दस्तावेज होना अनिवार्य है. ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, बीमा दस्तावेज और प्रदूषण प्रमाणपत्र. इन सभी दस्तावेजों को आप ‘डिजिलॉकर’ या ‘mParivahan’ ऐप पर डिजिटल रूप में रख सकते हैं, जो हार्ड कॉपी के समान ही मान्य हैं.
PUC प्रमाणपत्र की प्रक्रिया
PUC बनवाना बेहद सरल और किफायती है. वाहन के प्रकार (पेट्रोल/डीजल/टू-व्हीलर) के आधार पर इसकी फीस आमतौर पर ₹50 से ₹100 के बीच होती है. देश के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र उपलब्ध होते हैं.
जांच केंद्र पर एक पाइप को आपके वाहन के साइलेंसर में डाला जाता है ताकि निकलने वाले धुएं के घनत्व और हानिकारक गैसों की जांच की जा सके. यह पूरी प्रक्रिया मात्र 5-10 मिनट में पूरी हो जाती है और प्रमाणपत्र तुरंत मिल जाता है.