नई दिल्ली। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत को ओडिशा में एक किसान महापंचायत में शामिल होने के दौरान पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद भाकियू कार्यकर्ताओं ने तालग्राम थाने का घेराव किया है। कार्यकर्ताओं ने घोषणा की है कि जब तक राकेश टिकैत को सम्मानपूर्वक रिहा नहीं किया जाता, उनका धरना जारी रहेगा। तालग्राम थाने में महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष कुसुम चौहान सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी रात 9 बजे घेराव किया।
टिकैत की गिरफ्तारी के विरोध में मेरठ, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में भी भाकियू कार्यकर्ताओं ने थानों का घेराव किया। उन्होंने चक्काजाम करने की चेतावनी भी दी है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया है।
भारतीय किसान यूनियन, कन्नौज के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अपने नजदीकी थानों में पहुंचने का आह्वान किया गया है। भाकियू उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष शमीम सिद्दीकी गुरसहायगंज कोतवाली पहुंचे हैं और उन्होंने आसपास के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को वहां पहुंचने का आग्रह किया है।
देशभर में किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर
किसान नेता राकेश टिकैत की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही देशभर में किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। ओडिशा में राकेश टिकैत और उनके साथ मौजूद सैकड़ों किसानों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं ने जिला अध्यक्ष चौधरी अरब सिंह के नेतृत्व में एकजुट होकर खुर्जा नगर कोतवाली का घेराव किया। बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने नारेबाजी करते हुए ओडिशा सरकार के खिलाफ अपना कड़ा आक्रोश जाहिर किया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसान हितों की आवाज उठाने वालों को जेल भेजकर सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है।
लोकतंत्र पर हमला और तानाशाही का आरोप
भाकियू नेताओं ने राकेश टिकैत पर हुई इस कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह से लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। किसान नेताओं का मानना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे किसानों को गिरफ्तार करना सीधे तौर पर तानाशाही का परिचय देना है।प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसानों की आवाज को सलाखों के पीछे दबाना मुमकिन नहीं है और सरकार का यह कदम आंदोलन को और भी ज्यादा तेज करेगा।भाकियू कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि वे इस तरह की किसी भी दमनकारी नीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे। किसानों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी अपनी सतर्कता बढ़ा दी है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।