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कोरोना है कि जाता नहीं, फिर से स्टील्थ ओमिक्रॉन वैरिएंट की दहशत, चीन में तेजी से बढ़े केस

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नई दिल्ली। भारत समेत दुनिया भर में कोरोना वायरस के नए केसों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। इसके चलते उम्मीद की जा रही थी कि जल्दी ही देश को कोरोना संक्रमण से मुक्ति मिल जाएगी। हालांकि यह उम्मीद कमजोर पड़ती दिख रही है। इसकी वजह ओमिक्रॉन वैरिएंट का एक नया सब वैरिएंट डिवेलप होना है, जिसका नाम स्टील्थ रखा गया है। चीन में इसके मामले तेजी से मिल रहे हैं। इसके अलावा इजरायल ने भी इसके दो मामले मिलने की पुष्टि की है। इस नए वैरिएंट के चलते दुनिया में कोरोना वायरस की चौथी लहर आने का डर सताने लगा है।
स्टील्थ सब वैरिएंट इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसे डिटेक्ट करना मुश्किल है। यह ओमिक्रॉन वैरिएंट से काफी अलग है। यह ओमिक्रॉन के दो सब-वैरिएंट्स से मिलकर बना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यह सब-वैरिएंट भी ओमिक्रॉन के ही जितना खतरनाक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि इस वैरिएंट पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है क्योंकि यह टेस्टिंग में कम मिलता है। इसके अलावा दुनिया भर में घटते केसों को लेकर भी संस्था ने कहा कि टेस्टिंग कम हुई है और इसके चलते भी मामले कम देखने को मिल रहे हैं।
स्टील्थ वैरिएंट को लेकर राहत की भी एक बात
हालांकि स्टील्थ वैरिएंट को लेकर एक राहत की बात यह कही जा रही है कि इससे श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से पर ही असर पड़ता है। इसका अर्थ है कि फेफड़े तक यही नहीं पहुंचता और गले तक ही सीमित रहता है। ओमिक्रॉन के भी कुछ ऐसे ही लक्षण थे। इससे पहले भारत में दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार रहा डेल्टा वैरिएंट सीधे फेफड़ों पर अटैक कर रहा था और उसके चलते ऑक्सीजन की कमी देखने को मिली थी।
क्या हैं कोरोना वायरस के स्टील्थ वैरिएंट के लक्षण
एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टील्थ वैरिएंट से संक्रमित लोगों में चक्कर आने, कमजोरी और थकान के लक्षण देखने को मिलते हैं। वायरस से संक्रमित होने के दो से तीन दिन बाद ये लक्षण पाए जाते हैं। इसके अलावा बुखार, खांसी, गला में खिंचाव होना, मांसपेशियों में दर्द, सर्दी लगना और दिल की धड़कनें तेज होना भी इसके लक्षण हैं। चीन में इस वैरिएंट के चलते तेजी से केसों में इजाफा हुआ है। वुहान में ही तीसरी बार कोरोना के केस 5,000 के पार पहुंच गए हैं। इसके अलावा इजरायल ने भी दो केसों की पुष्टि की है।
भारत के लिए कितनी चिंता की बात
आईआईटी कानपुर की स्टडी में दावा किया गया है कि भारत में 22 जून तक कोरोना की चौथी लहर शुरू हो सकती है, जो अगस्त के मध्य तक पीक पर होगी। सूत्र मॉडल के जरिए अपने अध्ययन में आईआईटी ने दावा किया है कि यह लहर 4 महीनों तक बनी रहेगी। स्टडी में कहा गया है कि लोग जितना बाहर निकलेंगे और भीड़ जुटेगी, उतना ही इसके फैलने का खतरा होगा।


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