Home » एक्सक्लूसिव » क्या बंगाल में आकर मछली-मांस खाना या साड़ी पहनना बंद कर देंगे ? सीएम ममता ने केंद्र पर बोला हमला, कहा- दिल्ली से आकर बंगाल पर कब्जा नहीं किया जा सकता”

क्या बंगाल में आकर मछली-मांस खाना या साड़ी पहनना बंद कर देंगे ? सीएम ममता ने केंद्र पर बोला हमला, कहा- दिल्ली से आकर बंगाल पर कब्जा नहीं किया जा सकता”

कोलकाता। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर देशप्रिय पार्क स्थित भाषा स्मरण वेदी से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। भाषाशहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उन्होंने कहा कि “ग़ैर-बंगाली ताकतें गलतफहमी. . .

कोलकाता। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर देशप्रिय पार्क स्थित भाषा स्मरण वेदी से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। भाषाशहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उन्होंने कहा कि “ग़ैर-बंगाली ताकतें गलतफहमी में न रहें फड़ दिल्ली से आकर बंगाल पर कब्ज़ा नहीं किया जा सकता। पहले बंगाल की मिट्टी, संस्कृति और अस्मिता को समझना होगा।”
मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा, “क्या बंगाल में आकर लोग मछली-मांस खाना या साड़ी पहनना बंद कर देंगे? हमारी संस्कृति किसी की दया पर नहीं टिकी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाली भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में 1950 से मान्यता प्राप्त है और यह किसी की कृपा से नहीं मिली।

ध्रुपदी भाषा के दर्जे पर केंद्र से सवाल

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने शोध से जुड़े दस बोरे दस्तावेज़ दिल्ली भेजे, फिर भी बंगाली भाषा को ‘ध्रुपदी भाषा’ का दर्जा नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या बंगाल में साहित्यकारों और सांस्कृतिक परंपरा की कमी है? फिर बंगाली भाषा को यह सम्मान क्यों नहीं दिया जा रहा?”
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बंगाली भाषा को लेकर किए गए दावों का अप्रत्यक्ष जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल की संस्कृति को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

‘एकनायकतंत्र’ का आरोप

विधानसभा चुनाव से पहले इस कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने वर्तमान हालात को “एकनायकतंत्र” करार देते हुए आरोप लगाया कि बंगाली भाषा बोलने वालों को ‘घुसपैठिया’ कहकर प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक देश में किसी भाषा-भाषी समुदाय को डराने या उनका वोट छीनने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।” केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “ज़ोर-ज़बरदस्ती से आम के पेड़ पर अमरूद नहीं लग सकता। लोगों का दिल जीतना है तो पहले उन्हें सम्मान देना होगा।”

एकता और संघर्ष का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा, “एकुशे सिर्फ तारीख नहीं, संघर्ष और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जान दे देंगे, लेकिन सम्मान से समझौता नहीं करेंगे।” उन्होंने केंद्र की तुलना ‘दुर्योधन-दुशासन’ से करते हुए स्वेच्छाचारिता के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने राजबंशी, कामतापुरी, ओलचिकी, नेपाली और हिंदी सहित सभी भाषाओं के प्रति समान सम्मान का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन राज्य गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ हुआ।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम