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चैत्र नवरात्र की महाअष्टमी पर कल इतने बजे से शुरू होगा कन्या पूजन का मुहूर्त, जानें तिथि और समय

नई दिल्ली। आज से चैत्र नवरात्र की पावन शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान घर-घर में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इन नौ दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष. . .

नई दिल्ली। आज से चैत्र नवरात्र की पावन शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान घर-घर में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इन नौ दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है और कई लोग इस दिन कन्या पूजन कर अपना व्रत खोलते हैं। लेकिन, अक्सर हिंदू पंचांग के अनुसार, तिथियों के घटने-बढ़ने के चलते व्रत त्योहारों की तारीखों को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन हो जाती है, तो आइए यहां जानते हैं कि इस साल दुर्गा अष्टमी कब मनाई जाएगी?

कब है दुर्गा अष्टमी?

वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 मार्च दिन बुधवार को दोपहर में 01 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 26 मई दिन गुरुवार को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर दुर्गा अष्टमी 26 मार्च दिन गुरुवार को मनाई जाएगी।

महाअष्टमी का धार्मिक महत्व

महाअष्टमी के दिन सुबह स्नान आदि के बाद मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा करें। महागौरी को सफेद रंग बेहद प्रिय है, इसलिए उन्हें सफेद फूल, नारियल और मिठाई का भोग लगाएं। अष्टमी के दिन ‘संधि पूजा’ का भी बहुत महत्व है। यह पूजा अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट के बीच की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इसी समय मां दुर्गा ने चंड और मुंड नामक असुरों का वध किया था।

पूजन मंत्र (Durga Ashtami 2026 Pujan Mantra)

  1. ॐ देवी महागौर्यै नमः
  2. श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
    महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
  3. वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्।
    पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्॥

कन्या पूजन शुभ मुहूर्त

महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन के लिए पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 18 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 55 मिनट से दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

कन्या पूजन के समय बरतें ये सावधानियां


कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को बुलाएं. नवरात्रि में 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन ही श्रेष्ठ होता है। कन्याओं के घर आने पर सबसे पहले उनके पैर धोकर उन्हें बैठने के लिए आसन दें। कन्याओं को भोजन कराते समय मानसिक और शारीरिक रूप से स्वयं को शुद्ध रखें. इस बात का ध्यान रखें कि कन्याओं के लिए तैयार भोजन (हलवा, पूड़ी, चना) पूरी तरह सात्विक रहे। इसमें भूलकर भी प्याज या लहसुन न डालें। सभी कन्याओं को एक समान आदर दें. कन्याओं को भोजन के लिए मजबूर न करें, वे जितना प्रेम से खाएं उतना ही खिलाएं। विदाई के समय उनके पैर छूकर आशीर्वाद अवश्य लें।

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