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जन गण मन से पहले बजेगा वंदे मातरम :3 मिनट 10 सेकेंड के राष्ट्रगीत के दौरान खड़े होना जरूरी; केंद्र ने नई गाइडलाइन जारी की

नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के लिए एडवायजरी जारी की है। इसमें 6 छंदों वाले वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही इसमें बताया गया कि वंदे मातरम कब गाना, कितना. . .

नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के लिए एडवायजरी जारी की है। इसमें 6 छंदों वाले वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही इसमें बताया गया कि वंदे मातरम कब गाना, कितना गाना, कहां और कैसे गाना है। गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक स्थलों पर शिष्टाचार और सम्मान के साथ वंदे मातरम को गाने के मार्गदर्शन जारी किया है। मंत्रालय ने 4 पन्नों में आदेश जारी करते हुए एडवायजरी दी है।
एडवायजरी में बताय गया कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम को गाने अथवा बजाने का समय करीब 3 मिनट 10 सेकंड है। इसके गाने के लिए 4 भागों में एडवायजरी जारी की गई है। पहले चरण में आधिकारिक पूरा वंदे मातरम लिखा है। दूसरे चरण में राष्ट्रीय गीत वादन, तीसरे चरण में सामूहिक गायन और चौथे चरण में सामान्य रूप से गायन बताया गया है।

सरकारी कार्यक्रमों की सूची

आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत अनिवार्य करते हुए एडवायजरी में बताया गया कि सिविल सम्मान समारोहों, औपचारिक राजकीय समारोहों तथा सरकार द्वारा आयोजित अन्य समारोहों में राष्ट्रपति के आने पर तथा ऐसे समारोहों से उनके जाते समय पर वंदे मातरम अनिवार्य हुआ। आकाशवाणी तथा दूरदर्शन से राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति के संदेश प्रसारित किए जाने से पहले और बाद में, राज्यपाल-उपराज्यपाल के अपने राज्य संघ शासित क्षेत्र में औपचारिक राजकीय समारोहों में आने पर और ऐसे समारोहों से उनके जाते समय और जब राष्ट्रीय झंडे को परेड में लाया जाए, तब भी वंदे मातरम अनिवार्य किया गया।

सिनेमा हॉल में लागू नहीं होंगे नए नियम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र ने 28 जनवरी को गाइडलाइन जारी की थी। 10 पेजों के आदेश में, सरकार ने यह भी कहा कि सिविलियन पुरस्कार समारोहों, जैसे कि पद्म पुरस्कार समारोह या ऐसे किसी भी कार्यक्रम में जहां राष्ट्रपति उपस्थित हों, वहां भी वन्दे मातरम बजाया जाएगा।
हालांकि, सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले ‘वन्दे मातरम’ बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा। अधिकारियों के मुताबिक नए निर्देश ‘वन्दे मातरम’ के सम्मान की स्पष्ट दिशा प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं।

बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।
1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम थीं।

शीतकालीन सत्र के दौरान हुआ था विवाद

केंद्र सरकार ने पिछले साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विशेष चर्चा का आयोजन किया था। लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राष्ट्रगीत को मुद्दा बना रही है।
वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम के हिस्से काटने का आरोप लगाया था। भाजपा ने 1937 में देश के पहले PM जवाहरलाल नेहरू की एक चिट्ठी शेयर की थी, जो उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को लिखी थी।
भाजपा ने आरोप लगाया था कि चिट्ठी में नेहरू ने संकेत दिया था कि वंदे मातरम की कुछ लाइनें मुसलमानों को असहज कर सकती है। संसद में बहस के दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के समान दर्जा दिया जाना चाहिए।

8 दिंसबर 2025: PM बोले- कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए

पीएम मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम् पर एक घंटे का स्पीच भी दी थी। उन्होंने कहा था- पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए और वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए। नेहरू को लगता था कि इससे मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है।
पीएम ने कहा, वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। वो कौन सी ताकत थी, जिसकी इच्छा पूज्य बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी। पीएम मोदी ने एक घंटे की स्पीच में 121 बार वंदे मातरम कहा था।

वंदे मातरम के चार छंद क्यों हटाए गए थे?

सव्यसाची भट्टाचार्य की किताब ‘वंदे मातरम: द बायोग्राफी ऑफ ए सॉन्ग’ के मुताबिक, 20 अक्टूबर 1937 को सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी में नेहरू ने लिखा था कि वंदे मातरम् की पृष्ठभूमि और भाषा मुसलमानों को असहज करती है और इसकी भाषा इतनी कठिन है कि बिना डिक्शनरी के समझना मुश्किल है।
उस समय वंदे मातरम को लेकर देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा था। जवाहरलाल नेहरू को यह विवाद एक संगठित साजिश का हिस्सा लगता था। इसी मुद्दे पर उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह लेने की बात भी लिखी।
22 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने मूल गीत के छह अंतरों में चार अंतरे हटाने का फैसला लिया था। इस बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजनी नायडू सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।

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