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जाने आखिर पाकिस्तान ने क्यों किया थूककर चाटने वाला काम, ICC ने किन मांगों को किया स्वीकार? अंदर की कहानी आई सामने

डेस्क। भारत और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप 2026 को लेकर चला आ रहा हफ्तों पुराना गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। बहिष्कार की धमकियों और कई दौर की बातचीत के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने मैच खेलने. . .

डेस्क। भारत और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप 2026 को लेकर चला आ रहा हफ्तों पुराना गतिरोध आखिरकार खत्म हो गया है। बहिष्कार की धमकियों और कई दौर की बातचीत के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने मैच खेलने पर अपनी सहमति दे दी है। इस पूरे ड्रामे ने खेल के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है, जहाँ खेल की तुलना में कूटनीति और पर्दे के पीछे चल रही राजनीति अधिक हावी नजर आई।

​मोहसिन नकवी का विवादित बयान

​विवाद उस समय और गहरा गया जब पीसीबी प्रमुख मोहसिन नकवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सैन्य नेतृत्व का जिक्र किया। उन्होंने भारत और आईसीसी के दबाव को नकारते हुए फील्ड मार्शल असीम मुनीर का नाम लेकर अपनी निडरता का दावा किया। ​नकवी का यह बयान स्पष्ट संकेत था कि पाकिस्तान इस विवाद को केवल एक खेल के रूप में नहीं, बल्कि अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और नागरिक-सैन्य गौरव से जोड़कर देख रहा है।

पाकिस्तान की अधूरी मांगें

​आक्रामक रुख अपनाने के बावजूद पाकिस्तान को मेज पर कोई बड़ी कूटनीतिक जीत नहीं मिल सकी। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान इस पूरे प्रकरण से खाली हाथ लौटा है क्योंकि उसकी कोई भी मुख्य शर्त पूरी नहीं हुई। ​भारत के साथ द्विपक्षीय सीरीज शुरू करने और त्रिकोणीय सीरीज आयोजित करने के पाकिस्तान के प्रस्तावों को आईसीसी ने सिरे से खारिज कर दिया, जिससे पीसीबी को रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ा।

​रणनीतिक समझौता और वापसी

​अंततः अंतरराष्ट्रीय निलंबन और भारी वित्तीय नुकसान के डर से पाकिस्तान ने अपने कदम पीछे खींच लिए। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मित्र देशों के बीच हुई चर्चा के बाद टीम को कोलंबो भेजने का निर्णय लिया गया। ​इसे पाकिस्तान की एक रणनीतिक वापसी माना जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बिरादरी में अपनी जगह सुरक्षित रखी जा सके और टूर्नामेंट का हिस्सा बना रहा जा सके।

​आईसीसी का बांग्लादेश पर नरम रुख

​दूसरी ओर, आईसीसी ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के प्रति काफी उदारता दिखाई है। सुरक्षा कारणों से भारत में न खेलने के बावजूद बांग्लादेश पर कोई आर्थिक या प्रशासनिक जुर्माना नहीं लगाया गया है। ​आईसीसी ने संतुलन बनाने के लिए बांग्लादेश को भविष्य में (2028-2031 के बीच) एक बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी का आश्वासन भी दिया है, जिससे उनके असंतोष को शांत किया जा सके।

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