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जिस फिल्म ने राजपाल यादव की लुटिया डुबोई, उसमें थे 170 कलाकार, ओम पुरी से असरानी सब ‘अता पता लापता’

डेस्क। राजपाल यादव इस वक्त पर्सनल लाइफ में अपनी प्रफेशनल लाइफ की वजह से जिंदगी के उस मोड़ पर आ चुके हैं, जहां आना कोई पसंद नहीं करता। हालात, ऐसे हुए कि उन्हें जेल में सरेंडर करना पड़ा है। हालांकि,. . .

डेस्क। राजपाल यादव इस वक्त पर्सनल लाइफ में अपनी प्रफेशनल लाइफ की वजह से जिंदगी के उस मोड़ पर आ चुके हैं, जहां आना कोई पसंद नहीं करता। हालात, ऐसे हुए कि उन्हें जेल में सरेंडर करना पड़ा है। हालांकि, उनके इस हाल के पीछे जो फिल्म है, आज हम यहां उसके बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जो हो सकता है आपने पहले न सुना हो। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि ये फिल्म साल 2012 में आई ‘अता पता लापता’ थी, जिसे बनाने में राजपाल यादव ने अपना सबकुछ झोंक दिया और अब वो सड़क पर आ गए हैं। आइए, जानते हैं राजपाल यादव के गले फांस बन चुकी इस फिल्म को वो क्यों बनाना चाहते थे और क्या थी इसकी कहानी।

फिल्म ‘अता पता लापता’ एक अलग तरह का प्रयोग था

कॉमेडियन ने फिल्म को लेकर एक बार अपने प्रोडक्शन के यूट्यूब चैनल पर दिल खोलकर बातें की थीं। राजपाल यादव ने बताया था कि ये है, जो काफी सरल है। उन्होंने बताया था कि इस फिल्म में 2-4 कलाकार नहीं बल्कि 170 कलाकार हैं। राजपाल ने ये भी कहा था कि ये अपने तरह की ऐसी पहली फिल्म है जिसके सामने है म्यूजिक है और बैकग्राउंड में ड्रामा है।

‘लगा अर्थपूर्ण, उद्देश्यपूर्ण और मनोरंजक सिनेमा बना सकूं’

उन्होंने कहा था, ‘इसमें कोई आपको बॉलीवुड का डायरेक्टर नहीं मिलेगा, कोई हॉलीवुड का डायरेक्टर नहीं दिखेगा। ये एक ऐसा देसी ब्रॉड वे है। मुझे लगता है कि 10-12 साल हमने दो-दो, तीन-तीन शिफ्ट में काम किया, 25 साल हो गए हमें नुक्कड़, गली में, प्रोसिनियम में अभिनय करते-करते। दिमाग में यही आया था कि एक ऐसा अर्थपूर्ण, उद्देश्यपूर्ण और मनोरंजक सिनेमा बना सकूं। तो अता पता लापता उसी की एक नई कड़ी है जो हमने पेश करने की कोशिश की है।’

‘पहली बार फोर ग्राउंड में म्यूजिक और बैकग्राउंड में ड्रामा’

राजपाल यादव ने आगे कहा था, ‘टाइम आया और वो ऐसी फिल्म थी कि मुझे लगता है कि अगर मैं 4-5 साल भी घूमता लोगों को प्रड्यूस करने के लिए तो उसको कोई नहीं करता। उसमें सब 170 कलाकार हैं, थिएटर के हैं, 10-15 ऐसे लोग हैं हमारे जैसे जो हर दूसरी-तीसरी फिल्म में काम करने का सौभाग्य पा जाते हैं। एक तो वो फिल्म बड़ी बजट की फिल्म है। बहुत सारी प्रफेशनल, व्यवसायिक, टेक्निकल चीजों में डिस्कशन करते तो हमें नहीं लगता कि वो कोई प्रड्यूस करता। पहली बार फोर ग्राउंड में आपको म्यूजिक दिखेगा और बैकग्राउंड में ड्रामा दिखेगा। तो इसको मैं किस डायरेक्टर को कहूं कि वो पूरी फिल्म बनाए।’

‘200-300 बार इसको अपने दिमाग में ही पकाया’

उन्होंने आगे कहा था, ‘चूंकि ये हमारे दिमाग की ऊपज थी, इसको बनाने से पहले, स्क्रिप्ट लिखने से पहले जब आइडिया आया था तो 200-300 बार इसको अपने दिमाग में ही पकाया था। फिर धीरे-धीरे इसको कागज पर लाना शुरू किया। मुझे लगा कि 4-5 साल अपनी फिल्म लेकर घूमूं, अपना टाइम बर्बाद करूं तो अगर फिल्म हमारे दिमाग की ऊपज है, एक मोहम्मद सलीम जी का आइडिया है, उसको हम चार लोगों ने स्क्रीनप्ले डायलॉग में तब्दील किया और ये फिल्म बनाने का निर्णय ले लिया।’

कहा- टाइटल ऐसे ही मजाक-मजाक में रखा गया

फिल्म के टाइटल को लेकर राजपाल यादव ने कहा, ‘हमारा एक कॉस्ट्यूम डिजाइनर दोस्त है, वो ऐसे ही बात करते हुए बोले- अता पता लापता तो मैंने कहा- हमारा टाइटल मिल गया। ये टाइटल ऐसे ही मजाक-मजाक में रखा गया, पहले एक-दो और नाम थे लेकिन अता पता पर जब आए तो दूसरा टाइटल सोचने की भी कोशिश नहीं की। तो अता पता लापता से कोशिश कर रहा हूं कि एक नया पता मिल जाए।’

राजपाल बोले थे- हमारा फिल्म बनाना सार्थक

एक्टर ने अपने प्रॉडक्शन हाउस के यूट्यूब चैनल पर इस फिल्म को लेकर आखिर में कहा, ‘सबने कहा कि हट कर है, कुछ इंटरेस्टिंग है, जैसे प्रोमो छूटा तो सबने कहा कि फिल्म हटके दिख रही है। हमारा फिल्म बनाना सार्थक हो गया।
सबने कहा कि हट कर है, कुछ इंटरेस्टिंग है, जैसे प्रोमो छूटा तो सबने कहा कि फिल्म हटके दिख रही है। हमारा फिल्म बनाना सार्थक हो गया।

क्या है ‘अता पता लापता’ की कहानी

अब फिल्म की कहानी की बात करें तो ये मानव चतुर्वेदी (राजपाल यादव) की है जिसने घर से सारा सामान गायब होने की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। एक रात अचानक उनका घर निर्माण स्थल से गायब हो जाता है जिसके बाद वो कानून की मदद लेने के लिए आगे आते हैं और खुद ही शक के दायरे में आ जाते हैं हैं। उन पर इंश्योरेंस की रकम पाने के लिए अपना ही घर गिराने का संदेह है। मामला मीडिया की नजर में आ जाता है और इसी दबाव के कारण अधिकारियों को चोरी की बात स्वीकार करनी पड़ती है। फिल्म प्रशासन, नौकरशाही और सत्ता में बैठे लोगों के रवैये की खामियों पर बेस्ड है। इस फिल्म में राजपाल यादव के अलावा, फिल्म में असरानी, ओम पुरी , आशुतोष राणा , मनोज जोशी , गोविंद नामदेव , दारा सिंह , विक्रम गोखले , विजय राज और सत्यदेव दुबे जैसे कई बेहतरीन कलाकार हैं।

एक्टर पर क्यों लगे चेक बाउंस के आरोप

अब बात करते हैं इस फिल्म को लेकर उठे बवाल की। बता दें कि ये कहानी उसी समय शुरू हुई जब फिल्म की नींव पड़ी। यानी साल 2010 में जब राजपाल यादव ने बतौर डायरेक्टर ये फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने की तैयारी शुरू की तो M/s Murali Projects प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी से 5 करोड़ रुपये उधार लिए इस शर्त पर कि सूद समेत 8 करोड़ रुपये चुकाएंगे। फिल्म बनी लेकिन उम्मीद के मुताबिक चल नहीं पाई। आखिरकार राजपाल यादव को तगड़ा धक्का लगा और जिस कंपनी से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिए वो भी डूब गया। अब एक्टर वो रकम लौटा नहीं पाए जिसके बाद कंपनी ने राजपाल यादव के खिलाफ केस कर दिया । एक्टर पर आरोप लगाया गया कि राजपाल ने जो भी चेक दिए, वो बाउंस हो गए। इसी मामले में आज वो तिहाड़ जेल में हैं।

राजपाल बोले- कर्ज लिया नहीं, उन्हें पोते को हीरो बनाना था

राजपाल यादव ने ‘लल्लनटॉप’ को दिए इंटरव्यू में अपने 5 करोड़ रुपये कर्ज के बारे में बातें की थीं। उन्होंने कहा था, ‘ये पैसे उनसे लिए नहीं गए, उन्होंने इन्वेस्ट किए फाइनैंसर के तौर पर। उनको अपने पोते को हीरो बनाना था।’

एक्टर राजपाल यादव के लिए उठे मदद के कई हाथ

हालांकि, उन्हें चाहने वाले और बॉलीवुड के लोग भी इस बात से दुखी हैं और एक्टर की मदद के लिए कई हाथ आगे बढ़े हैं। सोनू सूद से लेकर तेजप्रताप यादव, केआरके, गुरमीत चौधरी और राव इंद्रजीत सिंह यादव जैसे कई लोगों ने उनकी मदद की है।

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