नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग नोटिस को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह फैसला विपक्षी दलों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। 12 मार्च 2026 को 193 सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) द्वारा हस्तारित यह नोटिस स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पहला महाभियोग प्रयास था।
राज्यसभा सभापति ने खारिज किया महाभियोग नोटिस
राज्यसभा सभापति ने Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा 3 के तहत नोटिस और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत समीक्षा के बाद फैसला लिया कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं है। सभापति ने स्पष्ट कहा कि महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पर्याप्त वजह नहीं मिली। इससे विपक्ष द्वारा शुरू की गई पूरी कार्रवाई रुक गई है।
विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार पर लगाए थे सात गंभीर आरोप
विपक्षी सांसदों ने नोटिस में ज्ञानेश कुमार पर सात गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण, सिद्ध कदाचार, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना और बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना शामिल था। खासतौर पर बिहार में मतदाता सूचियों की विशेष गहन समीक्षा (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे, जिसमें कई योग्य मतदाता सूची से बाहर हो गए। विपक्ष ने दावा किया कि CEC ने कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में रवैया अपनाया और संविधान के अनुच्छेद ३२४(५) तथा संबंधित कानूनों का उल्लंघन किया।