नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रंप को भले ही रेसिप्रोकल टैरिफ मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इसके बावजूद उनका टैरिफ अभियान जारी रहा। पहले 10% वैश्विक टैरिफ लगाए गए, जिन्हें बाद में 15% तक बढ़ाया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तनाव और बढ़ गया। अब अमेरिका ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयातित सोलर एनर्जी प्रोडक्ट्स पर भी निशाना साधा है।
जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने सोलर एनर्जी प्रोडक्ट्स भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। वाणिज्य विभाग का मानना है कि, यह कदम उन देशों के निर्यातकों को घरेलू अमेरिकी सोलर उत्पादों की तुलना में कम कीमत पर अपने उत्पाद बेचने से रोकने के लिए उठाया गया है। इस फैसले का उद्देश्य अमेरिका में सोलर ऊर्जा निर्माताओं को लाभ पहुंचाना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
भारत पर 126 प्रतिशत टैरिफ
इंडोनेशिया के लिए यह प्रारंभिक शुल्क 86% से 143% और लाओस के लिए 81% तय किया गया है। ये दरें विदेशी सब्सिडी और बाजार मूल्य को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। वहीं भारत के लिए यह शुल्क 126% निर्धारित किया गया है। भारत पर इस टैरिफ का असर खास तौर पर सोलर ऊर्जा सेक्टर में देखा जा सकता है। इससे न केवल भारत से होने वाले सोलर एनर्जी निर्यात में गिरावट आ सकती है, बल्कि इससे जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और भारतीय निर्यातकों को वैकल्पिक बाजार तलाशने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ नीति के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की संभावना है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए ये टैरिफ स्पष्ट संकेत हैं कि अमेरिका घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने और विदेशी प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करने के लिए कट्टर कदम उठा रहा है।
इस नीति का दीर्घकालीन प्रभाव यह हो सकता है कि भारत और अन्य प्रभावित देशों को अपनी निर्यात रणनीतियों में बदलाव करना पड़े और अमेरिकी बाजार के लिए उत्पादन लागत और मूल्य संरचना पर ध्यान देना पड़े।
Que: अमेरिका ने भारत से आयातित सोलर उत्पादों पर कितना टैरिफ लगाया है?
Ans: अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत से आयातित सोलर उत्पादों पर 126% टैरिफ लगाया है, ताकि घरेलू अमेरिकी सोलर उद्योग को संरक्षण मिले और सस्ते विदेशी उत्पादों से मुकाबला किया जा सके।
Que: अमेरिकी टैरिफ का वैश्विक सोलर बाजार पर क्या असर हो सकता है?
Ans: इस कदम से अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, भारतीय निर्यातकों को वैकल्पिक बाजार ढूंढने पड़ सकते हैं, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
Que: अमेरिकी टैरिफ का भारतीय सोलर कंपनियों पर क्या असर होगा?
Ans: 126% टैरिफ के कारण भारत से सोलर उत्पादों का निर्यात घट सकता है, जिससे संबंधित कंपनियों के शेयरों पर दबाव पड़ेगा और उन्हें अमेरिकी बाजार की रणनीति बदलनी पड़ सकती है।