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तृणमूल का घोषणापत्र तैयार : ‘मेये’ से ‘मां’ तक बदला नारा, सामाजिक सुरक्षा और ‘बंगाल अस्मिता’ पर बड़ा जोर , नये वादों के साथ सामने आयेगी सीएम ममता

कोलकाता। बंगाल की सत्ता चौथी बार पाने के लिए तृणमूल कांग्रेस मैदान में है। पार्टी ने चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र को अंतिम रूप दे दिया है। इस बार घोषणापत्र में नए वादों की बारी है. ममता बनर्जी शनिवार. . .


कोलकाता। बंगाल की सत्ता चौथी बार पाने के लिए तृणमूल कांग्रेस मैदान में है। पार्टी ने चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र को अंतिम रूप दे दिया है। इस बार घोषणापत्र में नए वादों की बारी है. ममता बनर्जी शनिवार तक पार्टी के घोषणा पत्र को जारी करेंगी। तृणमूल के घोषणापत्र में इस बार सामाजिक सुरक्षा पर अधिक जोर देने की बात सामने आ रही है। सत्तारूढ़ दल का जोर रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी रहने की बात कही जा रही है. इस बात पर भी सबकी नजर रहेगी कि ममता इस बार कोई नई योजना लाने की घोषणा कर सकती है।

तृणमूल ने गढा नया नारा

तृणमूल कांग्रेस इस बार अपने नारे में भी बदलाव लाने की सोच रही है. 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल का वोट-युद्ध का नारा था,‘बंगाल अपनी बेटी चाहता है। . इस बार, 2026 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए, तृणमूल का नया नारा है, ‘जो सबकी पुकार के लिए लड़ेगा, वही बंगाल माता को बचाएगा। ममता बनर्जी की जगह बंगाल को बचाने की बात तृणमूल की रणनीति का हिस्सा हैvआम आदमी के लिए इसमें क्या संभावनाएं हैं, यह देखना अभी बाकी है।

‘बंगाली गौरव’ फिर बनेगा हथियार

ममता बनर्जी इस चुनावी जंग में एक बार फिर ‘बंगाली गौरव’ को हथियार बनाने जा रही है। पिछले कुछ दिनों में ममता बनर्जी ने बंगाली गौरव का मुद्दा बार-बार उठाया है। उन्होंने अन्य राज्यों में बंगाली कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के सभी आरोपों को उजागर किया है। उन्होंने धर्मतला में मंच बनाकर विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने केंद्र सरकार को बंगाली विरोधी बताकर अपना रुख और कड़ा कर लिया है। इस बार तृणमूल राजनीतिक रूप से युद्ध छेड़ने जा रही है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पहले ही लक्ष्मी भंडार, युवा साथी जैसी योजनाओं के जरिए आम लोगों तक सीधे आर्थिक मदद पहुंचा चुकी है। चुनाव से ठीक पहले कई भत्तों की राशि भी बढ़ाई गई है, जिसे आम मतदाताओं को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

घोषणापत्र में किन मुद्दों पर फोकस?

टीएमसी के इस घोषणापत्र में खासतौर पर इन क्षेत्रों पर जोर दिए जाने की खबर है-सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार, रोजगार के नए अवसर पैदा करना, स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना और शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना। इसके अलावा, यह भी देखा जाएगा कि पार्टी कोई नई योजना या स्कीम पेश करती है या नहीं।

बदला चुनावी नारा: ‘मेये ’ से ‘मां’

2021 के चुनाव में टीएमसी का नारा था— “बांग्ला निजेर मेये केई चाए” (बंगाल अपनी बेटी को ही चाहता है)।
लेकिन 2026 के चुनाव में पार्टी ने अपना नारा बदलते हुए नया संदेश दिया है- “जो लड़ रहा सबके लिए / वही बचाएगा बंगाल मां को”। इस बदलाव को भावनात्मक और सांस्कृतिक अपील के रूप में देखा जा रहा है, जहां ‘बंगाल मां’ की रक्षा का संदेश दिया जा रहा है।

‘बंगाल अस्मिता’ बनेगी बड़ा मुद्दा

टीएमसी एक बार फिर ‘बंगाल अस्मिता’ को चुनावी हथियार बनाने की तैयारी में है। ममता बनर्जी पहले भी अन्य राज्यों में बंगाली मजदूरों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाती रही हैं और केंद्र सरकार पर ‘बंगाल विरोधी’ रुख अपनाने का आरोप लगाती रही हैं। कोलकाता के धर्मतला में विरोध प्रदर्शन कर उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता दी थी।

अब घोषणापत्र जारी होने का इंतजार

कुल मिलाकर, टीएमसी का यह घोषणापत्र 2026 के चुनाव में एक अहम राजनीतिक दस्तावेज साबित हो सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी जनता के लिए कौन-कौन से नए वादे और योजनाएं पेश करती है।

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