नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच भारत और ईरान ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर सहमति जताई है। इसके तहत हर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दी गई है। सूत्रों के अनुसार शिवालिक नामक जहाज जिसमें करीब 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी (तरल पेट्रोलियम गैस) भरी है, करीब 7 दिनों में भारतीय तट पर पहुंचेगा। साथ ही, एक अन्य जहाज भी इसी रूट से गुजरकर कुछ ही दिनों में भारत पहुंचेगा। यह डेवेलमेंट ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान ने कुछ खास जहाजों को इस विवादित जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। हर्मुज जलडमरूमध्य एक वैश्विक ऊर्जा मार्ग है और दुनिया के तेल के बड़े हिस्से का परिवहन इसी मार्ग से होता है। मौजूदा तनाव तब तेज हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आईं। इसके बाद ईरान ने हर्मुज जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली रही है। कच्चे तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक प्रभाव बढ़ा गया।
LPG लेकर आ रहा है शिवालिक
सूत्रों के मुताबिक एलपीजी से भरा शिवालिक जहाज हाल ही में ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह से रवाना हुआ। यह जहाज हर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरा और वर्तमान में भारतीय नौसेना की निगरानी में अपनी यात्रा जारी रख रहा है। नौसेना के एस्कॉर्ट का उद्देश्य है कि जहाज युद्धविक्षिप्त जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर सके और भारत पहुंच सके। भारत सरकार और ईरान के बीच इस मुद्दे पर कई दौर की सरकारी वार्ताएं हुईं, जिनमें अंतिम बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति अब्दुल नसीम खरराजी (Pezeshkian) के बीच गुरुवार को हुई थी। इन वार्ताओं में दोनों देश ने ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के मुद्दों पर सकारात्मक संकेत दिए।
हर्मुज जलडमरूमध्य
हर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तटीय मार्गों में से एक माना जाता है। यहां से अधिकांश मध्य पूर्व का कच्चा तेल, गैस और अन्य ऊर्जा संसाधन दुनिया के बाजारों तक पहुंचते हैं। अगर यह मार्ग बंद हो जाए, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है। हाल के तनाव की वजह से जब यह मार्ग संकुचित या प्रतिबंधित हुआ, तो तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल आया। कई देशों में ऊर्जा की लागत बढ़ गई और बाजार अस्थिर हो गए। इसी बीच भारत जैसी ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया।
हर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद नहीं हुआ
समझौते के बाद ईरान ने भी सार्वजनिक बयान जारी किए हैं। ईरान के भारत में राजदूत मोहम्मद फत्हाली ने स्पष्ट कहा कि हर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत हमारा मित्र है और हम मानते हैं कि हमारे और भारत के साझा हित हैं। आप कुछ ही समय में सुरक्षित मार्ग देखेंगे। इसी प्रकार, ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि, अब्दुल मजिद हकीम इलाही ने भी आश्वासन दिया है कि जलडमरूमध्य में कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि हमने कभी यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं किया। कुछ जहाज अभी भी पार हो रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संघर्ष के कारण नेविगेशन की मुश्किलें बढ़ी हैं और कुछ जहाजों के लिए मार्ग चुनौतीपूर्ण रहा है।
भारत-ईरान संबंध और भविष्य की राह
भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक रूप से अच्छे द्विपक्षीय संबंध रहे हैं, खासकर ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में। दोनों देशों ने सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर कई बार विचार-विमर्श किया है। मौजूदा समझौता इस बात का संकेत भी है कि सीमित संघर्ष के बावजूद महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के संचालन के लिए दोनों देशों ने आपसी सहमति बनाई है। एक्सपट्स मानते हैं कि अगर यह समझौता सफल रहता है और हर्मुज जलडमरूमध्य से शांति के साथ जहाज गुजरते रहते हैं, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आ सकती है।