गंगासागर। पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप पर आयोजित गंगासागर मेले में देर रात भीषण आग लगने से कई अस्थायी टेंट जलकर खाक हो गए। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गंगा स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु जुटे थे, तभी यह हादसा हुआ।
दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया
आग की शुरुआत खाने-पीने की दुकानों के पास से बताई जा रही है, जो तेजी से पूरे इलाके में फैल गई। लकड़ी और पॉलीथीन से बने टेंटों ने आग को भोजन बनाया। धुआं चारों ओर फैल गया, जिससे भगदड़ मच गई। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां पहुंचीं और दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
कई लोग घायल
भागते हुए कई लोग घायल हुए, लेकिन कोई जान नहीं गई। व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ है, जिनका सारा सामान जल गया। भाजपा ने इसे सरकार की लापरवाही करार देते हुए कड़ी आलोचना की। प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने कहा, ‘टीएमसी सरकार की उदासीनता से भक्तों की जान जोखिम में है।’
उन्होंने उच्च स्तरीय जांच और प्रभावितों को मुआवजे की मांग की। मेले में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। यह घटना बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा की पोल खोलती है। श्रद्धालु निर्भय होकर स्नान करें, इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
भाजपा ने की आलोचना
भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “यह कोई एकमात्र घटना नहीं है। यह एक चिंताजनक पैटर्न का हिस्सा है। साल दर साल गंगासागर मेला अव्यवस्था, खराब प्लानिंग और जन सुरक्षा के प्रति चौंकाने वाली लापरवाही के लिए जाना जाता है। पहले भी भगदड़ में कई लोगों की जान चली गई थी। इस बार मेले के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में से एक में भीषण आग लग गई।” उन्होंने लिखा, “जब लाखों श्रद्धालु एक पवित्र स्थान पर इकट्ठा होते हैं, तो बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था कोई विकल्प नहीं है, बल्कि यह एक जिम्मेदारी है। अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन, आपातकालीन निकास, भीड़ प्रबंधन और आपदा से निपटने की तैयारी को बाद की बात नहीं माना जा सकता।” अमित मालवीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल को सवाल पूछना चाहिए कि जवाबदेही तय करने से पहले कितनी चेतावनियों को नजरअंदाज किया जाएगा? राज्य सरकार गंगासागर को फोटो-ऑप कार्यक्रम मानना बंद करके इसे एक गंभीर प्रशासनिक जिम्मेदारी के तौर पर कब लेगी? इससे पहले कितनी और दुर्घटनाएं या त्रासदी होंगी?” उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म सम्मान का हकदार है। भक्तों को सुरक्षा मिलनी चाहिए। इसके बजाय उन्हें हर साल लापरवाही मिलती है।