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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की बिसात : पांच सीटों पर चुनाव की तैयारी, भाजपा और तृणमूल आमने-सामने

कोलकाता। बंगाल में 17वीं विधानसभा का अंतिम बजट सत्र शनिवार को समाप्त हो गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में व्यस्तता कम नहीं हुई है। एक ओर जहां अगले एक महीने के भीतर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा को लेकर सत्तारूढ़. . .

कोलकाता। बंगाल में 17वीं विधानसभा का अंतिम बजट सत्र शनिवार को समाप्त हो गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में व्यस्तता कम नहीं हुई है। एक ओर जहां अगले एक महीने के भीतर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क में जुट गए हैं, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा चुनाव को लेकर भी दोनों दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

बंगाल विधानसभा में चुनाव

अप्रैल 2026 में राज्यसभा की कुल 37 सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें बंगाल की पांच सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर चुनाव बंगाल विधानसभा के विधायकों के मतदान से होगा। जिन सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें तृणमूल के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी, साकेत गोखले और ऋतब्रत बनर्जी शामिल हैं। इसके अलावा माकपा नेता, वरिष्ठ अधिवक्ता और कोलकाता के पूर्व मेयर विकास रंजन भट्टाचार्य का कार्यकाल भी इसी अवधि में खत्म हो रहा है। वहीं मौसुम बेनजीर नूर के इस्तीफे के बाद एक सीट पहले से ही रिक्त है।

4 सीटों पर तृणमूल, 1 पर भाजपा की जीत तय

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए इन पांच सीटों में से चार पर तृणमूल और एक पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों दलों ने अपने विधायकों को सूचित कर दिया है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही उनसे संपर्क किया जाएगा।
राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक प्रत्याशी के लिए 10 प्रस्तावक और 10 समर्थक विधायकों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। त्रुटिरहित नामांकन सुनिश्चित करने के लिए दल एक प्रत्याशी के लिए कई नामांकन पत्र दाखिल करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, तृणमूल अपने चार प्रत्याशियों के लिए 200 से अधिक विधायकों को नामांकन प्रक्रिया में शामिल कर सकती है, जबकि भाजपा भी अपने 65 विधायकों के जरिए एक सीट के लिए कई नामांकन दाखिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।
विधानसभा सचिवालय का मानना है कि अधिसूचना जारी होते ही प्रक्रिया तेज हो जाएगी और चूंकि संख्या बल स्पष्ट है, इसलिए इस चुनाव में मतदान की नौबत नहीं आएगी। स्क्रूटनी के बाद प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जाने की पूरी संभावना है।
निर्विरोध निर्वाचन की संभावना
सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 50 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। चूंकि विपक्षी खेमा भाजपा के पास पर्याप्त संख्या है, इसलिए इस बार मतदान की नौबत आने की संभावना बेहद कम है।
माना जा रहा है कि नामांकन और स्क्रूटनी की प्रक्रिया पूरी होते ही प्रत्याशियों को जीत का प्रमाणपत्र सौंप दिया जाएगा।

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