नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 फरवरी को ‘परीक्षा पे चर्चा’ के दूसरे सेशन के दौरान छात्रों से बातचीत कर रहे हैं । इस एपिसोड में वह परीक्षा की तैयारी की रणनीतियों, स्ट्रेस को मैनेज करने के तरीकों और परीक्षाओं के दौरान आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की । आज के एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर रायपुर, गुजरात, गुवाहाटी में छात्रों से की बातचीत की। इस दौरान स्टूडेंट्स ने पीएम से कई सवाल पूछे। आप यहां से सभी सवाल और जवाब देख सकते हैं।
सवाल- स्टूडेंट को एग्जाम के बाद वेकेशन पर जाने का काफी मन करता है? आप इंडिया में ऐसी पांच जगह बता सकते हैं जहां हम भी जा सकें?
पीएम का जवाब- आप जिस तहसील से आते हैं। वहां ऐसी कौन-कौन चीजें हैं इसकी लिस्ट बनाओ। इसके बाद जिले में देखें। इसके बाद राज्य में ऐसी जगहें देखें। जहां आप नहीं गए हैं। हम कहीं भी जाएं। स्टूडेंट के रूप में जाना चाहिए। रेल के डब्बे में जाएं। खाना भी साथ में ले जाएं। देखना चाहिए कैसा कि अनुभव होता है। इससे आपको जीवन में सीखने को मिलता है। लोग कैसी बातें करते हैं। उनका कल्चर क्या है? भारत इतनी विविधता से भरा हुआ है कि एक जिंदगी भी कम पड़ जाए देखने के लिए।
क्या AI से डरने की जरूरत है?
इसके उत्तर में पीएम ने कहा कि ‘हर युग में जब भी कोई नई टेक्नोलॉजी आती है तो उसकी चर्चा होती है। हमें किसी भी चीज से डरना नहीं चाहिए। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम उसके गुलाम नहीं बनेंगे। मैं अपने जीवन में मैं ही निर्णय करूंगा। जैसे कुछ बच्चों का मोबाइल मालिक बन गया। मोबाइल नहीं है तो खाना नहीं खाएंगे। टीवी नहीं है तो जी नहीं सकते हैं। मतलब कि आप उसे गुलाम बन गए। मैं गुलाम नहीं बनूंगा। बस एक बात ये मन में पक्का कर लो। अगर मैं AI से पूछूं कि मुझे ये किताब से कहां से मिलेगी। तो वो आपको गाइड करेगा। हमेशा से नेचर ऑफ जॉब बदला है। लेकिन जीवन तो चलता रहा। तो हमें टेक्नोलॉजी को समझना होगा। खुद का विस्तार करना होगा। उसमें उसकी ताकत को जोड़ना होगा। अगर हम ऐसा करते हैं तो कितनी ही बड़ी टेक्नोलॉजी आ जाए। हमें उपयोग ही होने वाली है। हमें डरने की जरूरत नहीं है।’
डिसिप्लीन या मोटिवेशन क्या ज्यादा जरूरी?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जीवन में दोनों चीजें जरूरी हैं। अगर अनुशासन है ही नहीं तो वो इंस्पिरेशन किस काम का। मान लीजिए एक किसान है उसे प्रेरणा मिल रही है कि बगल वाला किसान बहुत फसल कर रहा है। उसकी एक एकड़ भूमि है, मेरी चार एकड़ है। वो ज्यादा कमाता है। मैं कम कमाता है। लेकिन बारिश से पहले खेत जोतना चाहिए। ये सोचना रह गया है। और खेत जोता नहीं। तो अगर वो कुछ भी करे। वो किसी काम का नहीं। यानी उसमें डिसिप्लीन नहीं था। बीज, खेत की जुताई ये पहले से करना चाहिए। जीवन में डिसिप्लीन बहुत अनिवार्य है। यह इंस्पिरेशन में सोने के सुहागा का काम करता है। अगर डिसिप्लीन नहीं है तो कितना ही इंस्पिरेशन क्यों न हो। वो बोझ बन जाता है। निराशा पैदा करता है।
2047 विकसित भारत के लिए हम क्या कर सकते हैं?
इस प्रश्न के जवाब में पीएम ने कहा कि मुझे अच्छा लगा कि मेरे देश के 10वीं 12वीं के छात्रों के मन में भी विकसित भारत की ड्रीम है। ये मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। आपने कभी सिंगापुर के बारे में सुना होगा। एक जमाने को वो देश कभी मछुआरों का देश था, जो आज इतना बड़ा बन गया। अगर हमें डेवलप कंट्री बनना है तो हमें अपनी आदतें भी ऐसी ही करनी होंगी। हमें थर्मल कंट्री की तरह नहीं करना कि कहीं पर भी कूड़ा कचरा फेंक दिया। कहीं पर भी थूक दिया। एक छोटी सी चीज है कि हम तय करेंगे कि हम खाने के बाद कुछ भी झूठा नहीं छोड़ेंगे। एक नागरिक के नाते अगर मैं इन चीजों का पालन करूं तो मैं विकसित भारत में अपना योगदान दे रहा हूं। मैं अपनी देश में बनीं चीजों को भी खरीदूं। अगर हम ऐसी छोटी-छोटी बातों का भी ध्यान रखें तो विकसित भारत में अपना योगदान दे सकते हैं।
पैशन या पढ़ाई किसे फॉलो करें?
मैं अपना पैशन और पढ़ाई दोनों को बैलेंस कैसे करूं? स्टूडेंट इस सवाल के जवाब में पीएम ने कहा कि आप ऐसा क्यों मानते हैं कि ये दोनों अलग चीजें हैं। दोनों उपयोगी हैं। जैसे मान लीजिए कि आपको आर्ट का शौक है। और आपने साइंस का कोई विषय पढ़ा। उसमें लैब का कोई चर्चा है। फिर जो कैमिकल पढ़ने के हैं, उनमें एक्सपेरिमेंट करके नया कलर बनाइए। तो आपकी दोनों चीजें आप बहुत अच्छी तरह से हो गई। आपकी थकान उतारने में भी यह मदद करती है।
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