कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिला है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ खुद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी थाने पहुंचीं और शिकायत दर्ज कराई। ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने किसी केंद्रीय जांच एजेंसी के खिलाफ सीधे पुलिस में मामला दर्ज कराया हो।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के शेक्सपियर सरणी थाना और बिधाननगर के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स थाना में दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं। शिकायत में ED पर अवैध तरीके से दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक डेटा ले जाने का आरोप लगाया गया है, जिसे मुख्यमंत्री ने ‘चोरी’ करार दिया है।
FIR क्यों दर्ज कराई?
इन्हीं आरोपों के आधार पर ममता बनर्जी ने अब औपचारिक रूप से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका साफ कहना है कि केंद्रीय एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है और यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।
ED ने I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के कार्यालय कल मारा था छापादरअसल, सोमवार सुबह से ही राज्य की राजनीति में तनाव का माहौल बना हुआ था। दिल्ली से जुड़े एक कथित वित्तीय धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में ED ने I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के कार्यालय और लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके आवास पर छापा मारा। तलाशी शुरू होने के कुछ ही देर बाद मौके पर कोलकाता के पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा भी पहुंच गए। इसके बाद जो हुआ, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।
जब ED अधिकारी प्रतीक जैन के घर के अंदर दस्तावेज़ों की जांच कर रहे थे, उसी समय अचानक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं और तुरंत घर के भीतर प्रवेश कर गईं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री का सीधे घटनास्थल पर पहुंचना राज्य में पहले कभी नहीं देखा गया। मुख्यमंत्री काफी देर तक वहीं मौजूद रहीं। उनके साथ विधायक सुजीत बोस और बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती भी थीं। उसी दिन ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ED ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कई अहम दस्तावेज़ अवैध रूप से जब्त कर लिए हैं। उनका दावा है कि सिर्फ कागजात ही नहीं, बल्कि लैपटॉप और मोबाइल फोन में मौजूद डेटा भी लिया गया है, वह भी बिना किसी वैध अनुमति के।
इन्हीं आरोपों के आधार पर मुख्यमंत्री ने अब औपचारिक रूप से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि ED ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है और यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।
मामला राजनीतिक रूप से भी और बड़ा रूप ले सकता है
इस घटनाक्रम के बाद प्रवर्तन निदेशालय के साथ-साथ केंद्र सरकार भी राजनीतिक दबाव में आ गई है। माना जा रहा है कि यह मामला आने वाले दिनों में सिर्फ कानूनी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी और बड़ा रूप ले सकता है।