कोलकाता। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को लेकर लंबे समय से उठते आ रहे “भेदभाव” के आरोपों के बीच अब एक बड़ा संकेत सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस का दावा रहा है कि जहां अन्य राज्यों में कम चरणों में चुनाव संपन्न हो जाते हैं, वहीं बंगाल में बार-बार कई चरणों में मतदान कराया जाता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था।
सीईओ कार्यालय एक चरण में चुनाव कराने के पक्ष में
इस बार हालांकि राज्य का मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय इस आरोप की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में पूरे विधानसभा चुनाव को एक ही चरण में कराने के लिए सीईओ कार्यालय पूरी तरह तैयार है। यदि चुनाव आयोग इस मुद्दे पर राज्य से औपचारिक राय मांगता है, तो सीईओ मनोज अग्रवाल का कार्यालय एक चरण में चुनाव कराने के पक्ष में अपनी सहमति दर्ज कराएगा।
अंतिम निर्णय लेने का अधिकार भारत के निर्वाचन आयोग के पास
सीईओ कार्यालय यह भी स्पष्ट करेगा कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर राज्य एक ही दिन में चुनाव संपन्न कराने में सक्षम है। हालांकि, इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार पूरी तरह से भारत के निर्वाचन आयोग के पास ही रहेगा।
हिंसा पर लगाम लगाने की कोशिश?
बंगाल में चुनाव और हिंसा को अक्सर एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना जाता है। हर चुनाव के साथ झड़प, बमबाजी और राजनीतिक टकराव की खबरें सामने आती हैं। ऐसे में एक वर्ग का मानना है कि यदि मतदान एक ही चरण में कराया जाए, तो लंबे समय तक चलने वाले चुनावी तनाव और हिंसा की संभावनाएं कम हो सकती हैं।
केंद्रीय बल सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि, एक चरण में चुनाव कराने के सामने सबसे बड़ी चुनौती है पर्याप्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की उपलब्धता। मौजूदा साल में बंगाल के अलावा कई अन्य राज्यों में भी विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि बंगाल में एक ही दिन में मतदान कराया जाता है, तो क्या केंद्रीय गृह मंत्रालय इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल उपलब्ध करा पाएगा?
तृणमूल की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
एक चरण में चुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता तन्मय घोष से सवाल किया गया। उन्होंने कहा, “जो अच्छा खेलते हैं, वे हर पिच पर शतक लगाते हैं। हमें इस बात की चिंता है कि आम लोग सुरक्षित रहें, न कि कितने चरणों में चुनाव हो रहा है।”
भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
वहीं भाजपा प्रवक्ता देवजीत सरकार ने कहा, “पूरा फैसला चुनाव आयोग का है। आयोग जितने भी चरण तय करेगा, भाजपा उसके लिए पूरी तरह तैयार है।”
नज़र आयोग के फैसले पर
कुल मिलाकर, बंगाल में एक चरण में विधानसभा चुनाव कराने को लेकर राज्य प्रशासन की ओर से सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अंतिम फैसला भारत के निर्वाचन आयोग के हाथ में ही है। आयोग क्या रुख अपनाता है, इस पर अब पूरे राज्य की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं।