Home » एक्सक्लूसिव » बंगाल में सियासी भूचाल : जाने I-PAC कंपनी किसने बनाई ? प्रतीक जैन कौन हैं ? ममता बनर्जी के लिए क्या बनाते हैं चुनावी रणनीति

बंगाल में सियासी भूचाल : जाने I-PAC कंपनी किसने बनाई ? प्रतीक जैन कौन हैं ? ममता बनर्जी के लिए क्या बनाते हैं चुनावी रणनीति

डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अचानक उठा तूफान, ED की छापेमारी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथ में दिखी हरी फाइल-इन सबके बीच एक नाम बार-बार सामने आया, I-PAC। सवाल उठने लगे कि आखिर यह I-PAC क्या है, इसे. . .

डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में अचानक उठा तूफान, ED की छापेमारी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हाथ में दिखी हरी फाइल-इन सबके बीच एक नाम बार-बार सामने आया, I-PAC। सवाल उठने लगे कि आखिर यह I-PAC क्या है, इसे किसने बनाया, और कौन हैं प्रतीक जैन, जिनके घर और दफ्तर पर ED की कार्रवाई हुई। ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक, I-PAC और प्रतीक जैन की कहानी बेहद दिलचस्प है।
8 जनवरी की सुबह ED ने मनी लॉन्ड्रिंग केस के सिलसिले में पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म I-PAC के कोलकाता स्थित ऑफिस और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। सुबह करीब छह बजे शुरू हुई जांच ने 11:30 बजे के बाद राजनीतिक रंग ले लिया, जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ईडी उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संवेदनशील दस्तावेज, हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची जब्त करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आइए जानते हैं I-PAC कंपनी और प्रतीक जैन के बारे में।


I-PAC क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई?

I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक बड़ी पॉलिटिकल कंसलटेंसी फर्म है। इसकी नींव 2013 में ‘Citizens for Accountable Governance’ यानी CAG के रूप में रखी गई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे औपचारिक रूप से I-PAC का रूप दिया गया। इसकी स्थापना देश के जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी, जिन्हें पीके के नाम से जाना जाता है।
I-PAC का मकसद था राजनीति और शासन में युवाओं और प्रोफेशनल्स की भागीदारी बढ़ाना, बिना किसी राजनीतिक दल का औपचारिक सदस्य बने। यही वजह है कि यह संस्था खुद को सिर्फ एक कंसलटेंसी नहीं, बल्कि एक पॉलिटिकल प्लेटफॉर्म बताती है।

प्रशांत किशोर के बाद I-PAC की कमान किसके हाथ

प्रशांत किशोर ने 2021 में सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद I-PAC से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद कंपनी की जिम्मेदारी तीन डायरेक्टर्स ने संभाली-ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन। इन तीनों की शैक्षणिक और प्रोफेशनल पृष्ठभूमि मजबूत मानी जाती है। ऋषि राज सिंह IIT कानपुर से पढ़े हैं, विनेश चंदेल NLIU भोपाल से कानून की पढ़ाई कर चुके हैं, जबकि प्रतीक जैन IIT बॉम्बे के स्कॉलर हैं। यही वजह है कि I-PAC को डेटा, टेक्नोलॉजी और ग्राउंड लेवल स्ट्रेटजी का मजबूत मिश्रण माना जाता है।

कौन हैं प्रतीक जैन?

प्रतीक जैन एक इंजीनियर से पॉलिटिकल कंसल्टेंट बने हैं। उन्होंने IIT बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और मटेरियल साइंस में पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने एक्सिस म्यूचुअल फंड में इंटर्नशिप भी की। इसके बाद 2012 में वह डेलॉइट में एनालिस्ट रहे। इसके बाद उन्होंने ‘Citizens for Accountable Governance’ के संस्थापक सदस्यों में से एक के तौर पर काम किया, जो आगे चलकर I-PAC बना। आज प्रतीक जैन I-PAC के डायरेक्टर हैं और साथ ही तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल के प्रमुख भी हैं, जिसकी पुष्टि खुद ममता बनर्जी कर चुकी हैं।

TMC और I-PAC का रिश्ता

2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से I-PAC तृणमूल कांग्रेस के साथ लगातार काम कर रही है। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की बड़ी जीत के पीछे I-PAC की रणनीति को अहम माना गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, I-PAC न सिर्फ चुनावी कैंपेन बल्कि उम्मीदवार चयन, डिजिटल रणनीति और जमीनी फीडबैक में भी बड़ी भूमिका निभाती है। I-PAC का सीधा तालमेल TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनके कार्यालय से बताया जाता है। I-PAC सिर्फ एक कंसलटेंसी नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय राजनीति में डेटा और रणनीति के बढ़ते असर की मिसाल है। ममता बनर्जी की जीत से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक, I-PAC का नाम लगातार चर्चा में रहा है। अब ईडी रेड के बाद यह फर्म एक बार फिर सुर्खियों में है, और आने वाले दिनों में इसकी भूमिका और जांच दोनों पर सबकी नजरें टिकी हैं।

I-PAC पर कार्रवाई की वजह क्या?

सूत्रों के मुताबिक, ईडी को शक है कि कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे गोवा भेजे गए और 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में TMC के प्रचार के लिए I-PAC को दिए गए। इसी कड़ी में I-PAC से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की गई है। हालांकि, इस पूरे मामले में न तो ईडी और न ही I-PAC की तरफ से अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किया गया है।

ED रेड पर ममता बनर्जी के गंभीर आरोप?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि एजेंसी उनकी पार्टी के चुनावी दस्तावेज, उम्मीदवारों की सूची और आंतरिक रणनीति से जुड़ा डेटा जब्त करना चाहती थी। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘नॉटी होम मिनिस्टर’ कहा और आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम