नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अपना 9वां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं. इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में करीब 7% ग्रोथ का संकेत दिया गया है। बजट में रोजगार योजनाओं के विस्तार और पूंजीगत निवेश पर जोर रहने की उम्मीद है। बजट में टैक्स, महंगाई, निवेश और ग्लोबल रिस्क पर सरकार क्या संदेश देती है, इस पर बाजारों की नजरें टिकी हैं।
इस बजट से जहां टैक्सपेयर्स को राहत की उम्मीद है तो वहीं मिडिल क्लास से लेकर गांव-किसान की नजरें भी सरकार पर टिकी हैं। निवेशक इस बात पर टिके हैं कि सरकार ग्रोथ और वित्तीय संतुलन के बीच कैसा तालमेल बैठाती है। यह बजट ऐसे वक्त में आ रहा है जब एक तरफ देश की घरेलू मांग मजबूत बताई जा रही है तो दूसरी तरफ दुनिया में उथल-पुथल का माहौल है।अमेरिकी टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।
10 हजार करोड़ का SME ग्रोथ फंड
वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि 10 हजार करोड़ का SME ग्रोथ फंड रहेगा. टेक्सटाइल सेक्टर को भी सरकार बूस्टर देगी. 5 लाख से ऊपर आबादी वाले शहरों में सरकार इन्फ्रा बूस्ट करेगी।
विकास का लाभ हर किसी तक पहुंचे
निर्मला सीतारमण ने कहा, मैं देश की जनता का आभार व्यक्त करती हूं, जो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की हमारी यात्रा में मजबूती से हमारे साथ खड़ी रही। हमारा लक्ष्य आकांक्षाओं को उपलब्धियों में और संभावनाओं को प्रदर्शन में बदलना है, ताकि विकास का लाभ हर किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, घुमंतू समुदायों, युवाओं, गरीबों और महिलाओं तक पहुंचे. वित्त मंत्री ने बजट भाषण की शुरुआत में यह भी कहा कि सरकार ने बयानबाज़ी की बजाय सुधारों को प्राथमिकता दी, और इसी नीति की वजह से जारी भू-राजनीतिक संकटों के बावजूद भारत 7.2 प्रतिशत की GDP वृद्धि दर हासिल करने में सफल रहा।
वित्त मंत्री ने बताया कैसे 7% ग्रोथ हासिल की
वित्त मंत्री ने कहा, हमने दूरगामी संरचनात्मक सुधारों, वित्तीय सतर्कता और मौद्रिक स्थिरता का रास्ता अपनाया, साथ ही सार्वजनिक निवेश पर मजबूत जोर दिया. आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक मानते हुए घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत की गई, ऊर्जा सुरक्षा को सशक्त किया गया और अहम आयात पर निर्भरता कम की गई। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि सरकार के हर कदम का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे. रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, घरेलू क्रय शक्ति और सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच के लिए सुधार किए गये। इन उपायों से करीब 7 प्रतिशत की उच्च विकास दर हासिल हुई और गरीबी घटाने व लोगों के जीवन स्तर में सुधार में अहम प्रगति हुई।