ढाका। बांग्लादेश में बीते महीने, 18 दिसंबर को युवा नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद शुरू हुआ हिंसा का सिलसिला लगातार जारी है। हिंसक भीड़ ने बार-बार अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाया है। इस हफ्ते बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की नई लहर में 24 घंटे के भीतर दो लोगों की हत्या की गई है। इन घटनाओं ने बांग्लादेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है।
बांग्लादेश में बीते 19 दिनों में छह हिंदू अल्पसंख्यकों की जान भीड़ ने ली है। सबसे ताजा घटना में सोमवार रात को नरसिंग्दी में किराना दुकानदार सरत चक्रवर्ती मणि और जशोर में पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की हत्या की गई है। सरत मणि पर नरसिंग्दी के बाजार में हमला किया गया। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। मणि कई साल दक्षिण कोरिया में काम करने के बाद कुछ समय पहले बांग्लादेश लौटे थे।
एक दिन में दो हत्या
सोमवार को ही जशोर के मनिरामपुर में हिंदू पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की भी हत्या कर दी गई। 45 वर्षीय राणा प्रताप एक फैक्ट्री मालिक और बीडी खबोर के कार्यकारी संपादक थे। उनको कोपलिया बाजार इलाके में सिर में गोली मारी गई और उनका गला रेत दिया गया। पुलिस ने बताया है कि हमलावर मोटरसाइकिल पर आए थे। उन्होंने राणा को फैक्ट्री से बाहर बुलाया और गोली मार दी।
हिंदू विधवा महिला से सामूहिक बलात्कार
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ क्रूर हमलों की शुरुआत बीते महीने उस्मान हादी की मौत के बाद शुरू हुई। इसका पहला शिकार मैमनसिंह जिले में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करे वाले मजदूर दीपू चंद्र दास बने। उनको भीड़ ने ईशनिंदा में पीट-पीटकर मार डाला था और उनके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा
बांग्लादेश में बीते हफ्ते 50 वर्षीय वर्षीय फार्मेसिस्ट खोखन दास पर दुकान बंद करके घर लौटते समय हमला किया गया। इस दौरान उनको गंभीर चोटें आई और अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। पिछले हफ्ते मैमनसिंह में हिंदू कपड़ा फैक्ट्री मजदूर बजेंद्र विश्वास को भी ड्यूटी पर जाते हुए गोली मार दी गई थी।
बांग्लादेश में जारी इस उथल पुथल में हिंदू महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा का भी दावा किया जा रहा है। झेनैदाह जिले में एक 40 वर्षीय हिंदू विधवा के साथ बलात्कार और पेड़ से बांदकर उसके बाल काटे जान का मामला सामने आया है। पीड़िता फिलहाल अस्पताल में भर्ती है, जहां उसका इलाज चल रहा है।
दुनिया में बढ़ी चिंता
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों ने दुनिया का ध्यान खींचा है। भारत समेत कई देशों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर फिक्र जाहिर किया है। दुनिया ने बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से अपने सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।
दुनिया
भारत-बांग्लादेश संबंध तनावपूर्ण होते जा रहे हैं
भारत और बांग्लादेश के संबंध अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने और भारत में शरण लेने के बाद से ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। हसीना की प्रो-इंडिया अवामी लीग सरकार के समय को दोनों देशों के बीच “स्वर्ण युग” कहा जाता था, लेकिन मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के आने के बाद संबंध तेजी से बिगड़े हैं। अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर बढ़ती हिंसा, हसीना की प्रत्यर्पण मांग और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक बदलावों ने इस तनाव को और गहरा किया है।
तनाव के प्रमुख कारणों में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर टारगेट हमले शामिल हैं, जिनमें हाल के महीनों में कई हत्याएं, मंदिरों की तोड़फोड़ और भीड़ हिंसा की घटनाएं हुई हैं। भारत ने इसे चरमपंथियों की “लगातार शत्रुता” करार दिया है, जबकि बांग्लादेश कुछ रिपोर्टों को अतिशयोक्तिपूर्ण या सामान्य अपराध बताता है। इसके अलावा, बांग्लादेश हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है ताकि उन पर मानवता के खिलाफ अपराधों के मुकदमे चलाए जा सकें, लेकिन भारत ने इसे घरेलू मामला मानते हुए अनुपालन नहीं किया। दोनों देशों के बीच राजनयिकों की तलबी, वीजा सेवाओं का निलंबन और दूतावासों के आसपास प्रदर्शन जैसे घटनाक्रम भी सामने आए हैं।