पटना। देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने तीन शातिर आरोपियों को दबोचा है। इनमें से एक नौशाद अली उर्फ लालू है, जो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कांटी (पनापुर करियात) थाना क्षेत्र के हरचंदा गांव का रहने वाला है। चौंकाने वाली बात यह है कि नौशाद एक साधारण पंचर बनाने वाली की आड़ में काम करते हुए, भारतीय सेना से जुड़ी गोपनीय रणनीतिक जानकारी सीधे पाकिस्तान भेज रहा था।
एक फोटो के लिए मिलते थे 4 से 6 हजार रुपये
पुलिस और खुफिया एजेंसियों द्वारा की गई जांच से पता चला है कि यह गिरोह देश-विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था। आरोपियों ने दिल्ली और हरियाणा के रेलवे स्टेशनों के पास रणनीतिक महत्व वाले स्थानों पर सोलर-पावर्ड कैमरे लगाए थे और उनकी योजना पूरे देश में ऐसे कुल 50 कैमरे लगाने की थी।
ये कैमरे इतनी होशियारी से छिपाए गए थे कि इनका पता लगाना मुश्किल था। इनके जरिए भारतीय सेना की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। DCP धवल जायसवाल के अनुसार, ये लोग सेना और संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें और वीडियो बनाते थे। इन्हें पाकिस्तानी व्हाट्सप्प ग्रुप्स पर भेजी गई हर तस्वीर या वीडियो के बदले 4 से 6 हजार रुपये तक की रकम मिलती थी।
मास्टरमाइंड का राइट हैंड है नौशाद
नौशाद अली उर्फ लालू करीब दो साल पहले अपने पिता जलालुद्दीन से एक लाख रुपये लेकर दिल्ली में काम शुरू करने गया था। वर्तमान में वह फरीदाबाद के नचौली गांव में एक पेट्रोल पंप पर पंचर की दुकान चला रहा था। जांच में पता चला कि नौशाद जासूसी नेटवर्क के मुख्य सरगना सुहेल मलिक उर्फ रोमियो का सबसे खास आदमी यानि राइट हैंड है।