नई दिल्ली। भारतीय विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साथ कई मोर्चों पर भारत का स्पष्ट और सख्त रुख सामने रखा। अमेरिका के साथ व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, चीन पाकिस्तान गठजोड़, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले, वैश्विक बहुपक्षीय संस्थाएं और कूटनीतिक मर्यादा जैसे मुद्दों पर भारत ने न केवल तथ्य रखे बल्कि संदेश भी दिया कि दबाव और दुष्प्रचार से हमारी नीति नहीं बदलेगी।
मोदी और ट्रंप ने 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत की
भारत और अमेरिका के रिश्ते में टैरिफ को लेकर चल रही तल्खियों के बीच विदेश मंत्रालय ने गरुवार को अपना रुख साफ किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब भारत और अमेरिका के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) और टैरिफ मुद्दों को लेकर तनातनी चल रही थी।
एमईए के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रिफिंग में कहा कि भारत और अमेरिका 13 फरवरी 2025 से दो-पक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसके बाद कई दौर की बैठकें भी हुईं और कई बार दोनों पक्ष समझौते के करीब भी पहुंचे। जायसवाल ने कहा कि रिपोर्ट्स में इन चर्चाओं को गलत तरीके से पेश किया गया है।
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच कई बार बातचीत
जायसावल ने आगे कहा कि पीएम मोदी और ट्रंप ने 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत की, जिसमें दोनों देशों के व्यापक सहयोग और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं का आपसी रिश्ता मित्रवत और सम्मानजनक रहा है। जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत संतुलित और सभी के लिए लाभकारी व्यापार समझौते के लिए इच्छुक है और आगे इसे पूरा करने का प्रयास जारी रखेगा।
क्या कहा अमेरिकी वाणिज्य सचिव ने
बता दें कि जायसवाल का यह बयान ऐसे समय में आया दजब इससे पहले अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड ल्यूटनिक ने दावा किया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया। ल्यूटनिक ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी से अनुरोध किया था कि वह ट्रंप से बात करें ताकि समझौता पूरा हो सके। हालांकि, भारत असहज था और इसलिए मोदी ने कॉल नहीं किया।
इस दौरान ल्यूटनिक ने यह भी कहा कि अमेरिका ने पहले इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ व्यापार समझौते किए और उन्हें उम्मीद थी कि भारत के साथ समझौता उनसे पहले हो जाएगा। उन्होंने कहा कि समझौते थोड़े महंगे हो गए और फिर भारत ने कहा कि अब हम तैयार हैं। मैंने कहा, तैयार किस बात के लिए?
पीएम मोदी-ट्रंप के बीच रिश्ते सम्मानजनक
जायसवाल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हमेशा मित्रवत और सम्मानजनक संबंध रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका पिछले साल फरवरी से दो-पक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। कई दौर की बातचीत हो चुकी है और दोनों पक्ष संतुलित और लाभकारी समझौते के करीब आए हैं। जायसवाल ने जोर देकर कहा कि भारत एक संतुलित और सभी के लिए लाभकारी व्यापार समझौते के लिए इच्छुक है।
500% टैरिफ के दावे पर भी बोला विदेश मंत्रालय
इससे पहले जब अमेरिकी सेंटेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो-पक्षीय रूस प्रतिबंध बिल को हरी झंडी दे दी है। इस बिल के तहत अमेरिका उन देशों, जैसे भारत, चीन और ब्राजील, पर दबाव डाल सकेगा, जो सस्ते रूस तेल की खरीद से पुतिन की युद्ध मशीन को वित्तीय मदद दे रहे हैं। बिल में रूस से आयातित सभी सामान और सेवाओं पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रावधान है। इसपर भी जायसावल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि इस बिल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नई दिल्ली इस बिल से अवगत है और इसे करीब से देख रही है। उन्होंने कहा कि हम इस प्रस्तावित बिल से अवगत हैं और हालात पर नजर रख रहे हैं। भारत का ऊर्जा निर्णय हमेशा ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार होता है। गौरतलब है कि जायसवाल यहां उस बिल की बात कर रहे थे, जो कि अमेरिका के सदन में पेश किया गया है। इस बिल में उन देशों पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात की गई है जो रूस से तेल खरीदते रहेंगे। इसके बाद भारत ने शुक्रवार को कहा कि वह अपनी 1.4 अरब जनता के लिए सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा सुनिश्चित करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले लेता है।