रणथम्भौर। सवाई माधोपुर के रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में, जंगल में गश्त करते समय दो वनकर्मियों की जिंदगी खतरे में पड़ गई। सोमवार सुबह लगभग 9:30 बजे, जब ये वनकर्मी बाइक से गश्त पर थे, तभी अचानक एक बाघ उनके सामने आ गया। बाघ ने अपनी ओर झपटा और वनकर्मी बाइक छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए। उस समय उनकी जान बचने की दौड़ ने उन्हें कुछ दूर तक सुरक्षित पहुँचाया।
10 मिनट तक बाघ का आतंक
बाघ, जो कि RBT-2511 के नाम से जाना जाता है, बाइक के पास लगभग 10 मिनट तक रहा। इस दौरान वह बाइक को अपनी पंजों और जबड़ों से दबोच कर घसीटता रहा। वनकर्मियों के हाथों में डंडे थे, लेकिन उन्होंने स्थिति को देखकर समझदारी से बाघ का मुँह देखने का फैसला किया। यह सभी घटनाएँ उस समय घटित हुईं जब वनकर्मियों की सांसें अटकी रहीं।
बाघ की खतरनाक हरकतें
जब दोनों वनकर्मी सुरक्षित दूरी पर खड़े रहे, तब बाघ ने बाइक के पास जाकर उसे खींचने की कोशिश की। उसने बाइक की सीट को भी फाड़ दिया और कई बार उस पर हमला किया। इस खतरनाक मंजर को देखकर सभी वनकर्मियों ने शांति बनाए रखने का प्रयास किया। कहा जा रहा है कि इस तरह की घटनाएं बाघ के व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण हैं।
पहले भी हुई थी खतरनाक घटनाएँ
यह पहली बार नहीं है जब बाघ ने किसी वनकर्मी पर हमला किया हो। 12 मई 2025 को इस क्षेत्र में रेंजर देवेंद्र चौधरी को भी बाघ ने मार डाला था। ताजा घटनाओं को देखकर वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे खतरनाक क्षेत्रों में बाघों का व्यवहार अत्यधिक आक्रामक हो सकता है।
तुरंत राहत और सुरक्षा की जरूरत
विशेषज्ञों का सुझाव है कि इन स्थितियों से बचने के लिए वनकर्मियों को चार पहिया वाहन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इससे न सिर्फ उनकी सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि उन्हें गश्त करने में भी आसानी होगी। हाल ही में, रणथम्भौर में एक 7 साल के बच्चे को भी बाघ ने अपनी गिरफ्त में लिया था, जो इस बात की गंभीरता को और बढ़ाता है।
नागरिकों के लिए चेतावनी
बाघों की आक्रामकता के मद्देनजर, प्रशासन ने नागरिकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। ऐसे समय में जब पर्यमुख क्षेत्रों में बाघों की गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, लोगों को जंगल में जाने से पहले पूरी तैयारी और सतर्कता के साथ जाना चाहिए। इस समय वनकर्मियों और नागरिकों की सुरक्षा को अधिक प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।