कोलकाता। राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति को लेकर जारी लंबे विवाद के बीच राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने परस्पर दो दिनों में पाँच विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति कर दी है। लोकभवन सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने नियुक्ति पत्रों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और शीघ्र ही नवनियुक्त कुलपतियों को औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे।
गौरतलब है कि कुलपति नियुक्ति को लेकर नवान्न (राज्य सरकार) और लोकभवन के बीच टकराव अपने चरम पर पहुँच गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर दोनों पक्ष आठ विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति पर सहमत हुए। उसी सहमति के तहत अब नए सिरे से पाँच विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति की गई है।
लोकभवन के अनुसार, सोमवार को तीन विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्त किए गए। बाबा साहेब आंबेडकर शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति बने प्रो. अरुणाशीष गोस्वामी, उत्तरबंग कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति बनाए गए प्रो. देबब्रत बोस और पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी सौंपी गई प्रो. देबब्रत मित्र को सौंपी गई है।
मंगलवार को दो और विश्वविद्यालयों में नियुक्ति हुई। हरिचांद गुरूचांद विश्वविद्यालय के कुलपति बने प्रो. निमाईचंद साहा और संस्कृत कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त किए गए प्रो. अयन भट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है। राज्यपाल कार्यालय के विशेष कार्याधिकारी ने बताया कि सभी नवनियुक्त कुलपतियों को शीघ्र ही नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे।
इधर, राज्यपाल ने केवल कुलपति नियुक्ति तक सीमित न रहते हुए उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी कई अहम कदमों की घोषणा की है। कुछ सप्ताह पहले लोकभवन में आयोजित कुलपति सम्मेलन में राज्य के विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों के विकास तथा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
सम्मेलन में सबसे अधिक जोर कैंपस सुरक्षा पर दिया गया। निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक, विशेष रूप से फेस रिकग्निशन सिस्टम, के जरिए प्रवेश और निकास पर नजर रखी जाएगी, ताकि रैगिंग जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण हो सके। इसके अलावा, अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए विशेष सहायता विद्यालय (सपोर्ट स्कूल) स्थापित करने का प्रस्ताव भी स्वीकार किया गया है। साथ ही, प्रवासी छात्रों और श्रमिकों की सहायता के लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर शुरू करने का निर्णय लिया गया है, जो अंतरराज्यीय विश्वविद्यालयों से जुड़ा होगा। राज्य के उच्च शिक्षा तंत्र में इन नियुक्तियों और फैसलों को एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।