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विधानसभा चुनाव 2026 : महिलाओं को लुभाने के लिए ‘कैश ट्रांसफर’ बना चुनावी हथियार, लाड़ली बहना से गृह लक्ष्मी तक 12 राज्यों में शुरू हैं ऐसी योजनाएं

डेस्क। देश के 12 राज्य वित्तीय वर्ष 2025-26 में महिलाओं के लिए बिना शर्त नकद ट्रांसफर योजनाओं पर कुल 1.68 लाख करोड़ रुपये खर्च करने जा रहे हैं। तीन साल पहले यह संख्या केवल दो राज्यों तक सीमित थी, जो. . .

डेस्क। देश के 12 राज्य वित्तीय वर्ष 2025-26 में महिलाओं के लिए बिना शर्त नकद ट्रांसफर योजनाओं पर कुल 1.68 लाख करोड़ रुपये खर्च करने जा रहे हैं। तीन साल पहले यह संख्या केवल दो राज्यों तक सीमित थी, जो अब तेजी से बढ़कर 12 राज्यों तक पहुंच गई है। इन योजनाओं का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को हर महीने नकद सहायता देकर उन्हें सशक्त बनाना है। यह जानकारी PRS Legislative Research की रिपोर्ट में दी गई है।
भारतीय राजनीति में ‘महिला वोटर’ अब एक स्वतंत्र और निर्णायक साइलेंट वोटर के रूप में उभरी हैं। यही कारण है कि हाल के वर्षों में बीजेपी, कांग्रेस और ‘आप’ समेत तमाम राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों ने अपने घोषणापत्रों में ‘डायरेक्ट कैश ट्रांसफर’को सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाया है।

बिहार से बंगाल तक

पिछले साल बिहार चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कैश ट्रांसफर को लेकर जबरदस्त मुकाबला देखा गया। जहां नीतीश सरकार ने महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए 10,000 रुपये दिए, वहीं विपक्षी दलों ने 2,500 रुपये मासिक सहायता का दांव खेला। अब यही रणनीति आगामी पश्चिम बंगाल चुनाव में दिखने को मिल रही है, जहां टीएमसी की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के जवाब में अन्य दल बड़ी वित्तीय घोषणाएं करने की तैयारी में हैं।

ममता महिलाओं को हर महीने देंगी 1700 रुपये

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपना ’10 वादों वाला’ घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस मेनिफेस्टो का मुख्य आकर्षण ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना है, जिसमें वित्तीय सहायता को 500 रुपये बढ़ा दिया गया है। अब राज्य में सत्ता वापसी पर जनरल कैटेगरी की महिलाओं को 1,500 रुपये और SC/ST वर्ग को 1,700 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।

किसानों और युवाओं के लिए भी किया बड़ा ऐलान

इसके अतिरिक्त, युवाओं के लिए ‘बांग्लार युवा-साथी’ के तहत 1,500 रुपये मासिक भत्ता और किसानों के लिए ऐतिहासिक 30,000 रुपये करोड़ का कृषि बजट लाने का वादा किया गया है। स्पष्ट है कि टीएमसी एक बार फिर ‘कैश ट्रांसफर’ और सामाजिक सुरक्षा के जरिए महिला वोटरों और ग्रामीण आबादी को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।

बिहार में एनडीए और महागठबंधन में मची थी होड़

बीते साल बिहार चुनाव में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के नाम पर एनडीए और महागठबंधन के बीच ‘कैश ट्रांसफर’ की बड़ी जंग छिड़ी थी। जहां नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत 1.81 करोड़ महिलाओं को 10,000 रुपये की एकमुश्त सहायता देने का ऐलान किया था। वहीं, महागठबंधन ने इसे चुनौती देते हुए 2,500 रुपये मासिक भत्ते का बड़ा दांव खेला था। तेजस्वी यादव ने जीविका दीदियों को 30,000 रुपये मासिक वेतन और मकर संक्रांति पर विशेष बोनस का वादा कर महिला वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की।

प्रमुख चुनावी योजनाएं

पार्टियों के बीच महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर ‘निश्चित मासिक आय’ देने की होड़ मची है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बीजेपी की ‘लाडली बहना योजना’ और ‘माझी लाडकी बहण योजना’ ने चुनावों में गेम-चेंजर की भूमिका निभाई। दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने की घोषणा कर इस ट्रेंड को नई धार दी। कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस की ‘गृह लक्ष्मी योजना’ (2,000 रुपये मासिक) ने सत्ता वापसी में अहम भूमिका निभाई।

नंदीग्राम सीट बनी हाई-वोल्टेज चुनावी दंगल

नंदीग्राम विधानसभा सीट एक बार फिर देश के सबसे हाई-वोल्टेज चुनावी दंगल का केंद्र बन गई है। 2021 के कड़े मुकाबले में ममता बनर्जी को भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से 1,956 वोटों की मामूली हार झेलनी पड़ी थी। 2024 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, इस सीट पर भाजपा की बढ़त बढ़कर 8,200 वोट हो गई है। बता दें कि ममता बनर्जी इस बार नंदीग्राम से चुनाव नहीं लड़ेंगी। वे इस बार भवानीपुर से मैदान में होंगी। वहीं, भाजपा ने भवानीपुर और नंदीग्राम से सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारा है। अब 23 अप्रैल को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि क्या ममता बनर्जी अपनी पुरानी हार का बदला ले पाएंगी या शुभेंदु अधिकारी अपना किला बचाने में सफल होंगे।

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