नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीन दिन से चली आ रही तेजी पर आज ब्रेक लग गया। फाइनेंशियल, मेटल, ऑटो और एफएमसीजी शेयरों में भारी बिकवाली के कारण बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,400 अंक तक गिर गया था। आखिरकार बीएसई सेंसेक्स 1236.11 अंक यानी 1.48% की गिरावट के साथ 82,498.14 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 365 अंक यानी 1.41% फिसलकर 25,454.35 अंक पर था। इस गिरावट से बीएसई का मार्केट कैप 7.55 लाख करोड़ रुपये की गिरावट के साथ 464 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
फेडरल रिजर्व के अधिकारी इस बात पर बंटे हुए हैं कि ब्याज दरों में आगे कटौती होगी या नहीं। कुछ पॉलिसीमेकर्स का कहना है कि अगर महंगाई उच्च स्तर पर बनी रहती है तो उससे बोरोइंग कॉस्ट बढ़ने की आशंका है। कुछ जानकार फिलहाल इसमें कोई बदलाव करने के पक्ष में नहीं हैं। तेल की कीमतों में तेजी और ईरान तथा अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
शेयरों की चाल
सेंसेक्स के शेयरों में एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, इटरनल, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल और एसबीआई के शेयरों में तेजी आई जबकि क्वालिटी वॉल्स, इंडिगो, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, कोटक बैंक, बजाज फाइनेंस और अडानी पोर्ट्स के शेयरों में गिरावट रही। ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.25 फीसदी गिरावट आई जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.04 फीसदी तेजी आई। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.88 फीसदी और निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 0.22 फीसदी गिरावट रही। निफ्टी रियल्टी में 0.56% और निफ्टी प्राइवेट बैंक तथा एफएमसीजी में 0.2 फीसदी गिरावट रही।
रिलायंस के शेयरों में गिरावट
देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में करीब एक फीसदी गिरावट आई। पिछले सत्र में यह 1441.25 रुपये पर बंद हुआ था और आज 1441.55 रुपये पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 1426.65 रुपये तक गिरा। रिलायंस का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 1,611.20 रुपये और न्यूनतम स्तर 1,115.55 रुपये है। आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में भी गिरावट आई। 11 बजे यह 0.52% की गिरावट के साथ 1400.65 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।
रेट कट होगा या नहीं
अमेरिकी फेड रिजर्व के अधिकारी आगे की स्थिति को लेकर बंटे हुए हैं। कुछ पॉलिसीमेकर्स का कहना है कि अगर महंगाई उच्च स्तर पर बनी रहती है तो इससे उधारी की लागत बढ़ने की आशंका है। अगर यूएस फेडरल रिजर्व रेट कट में देरी करते हैं या रेट बढ़ाते हैं तो इससे भारतीय इक्विटीज पर बुरा असर होगा क्योंकि ज्यादा यूएस यील्ड से अमेरिकन एसेट्स एमर्जिंग मार्केट्स की तुलना में ज्यादा आकर्षक हो जाएगा। इससे भारत से एफपीआई का आउटफ्लो बढ़ सकता है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और लिक्विडिटी की स्थिति टाइट हो सकती है।
अमेरिका-ईरान
कच्चे तेल की कीमत में आज तेजी रही। ब्रेंट क्रूड 24 सेंट यानी 0.3% तेजी के साथ $70.59 प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक संकेतों के बावजूद सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। इनमें वॉरशिप, फाइटर जेट्स ौर हवा में तेल भरवाने वाले एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इससे साफ है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखा है।