नई दिल्ली। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को शेयर बाजार लाल निशान पर खुला। वहीं पिछले दिन गुरुवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 899.71 अंक उछलकर 80,015.90 अंक पर बंद हुआ था, जबकि 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 285.40 अंक की बढ़त के साथ 24,765.90 पर बंद हुआ था।
शुक्रवार सुबह बाजार खुलते ही बीएसई (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 572.43 अंक टूटकर 79,443.47 के स्तर पर आ गया। वहीं, एनएसई (NSE) का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 178.75 अंकों की भारी गिरावट के साथ 24,587.15 पर कारोबार करता दिखा।
IT सेक्टर 1.28% से ज्यादा चढ़ा
आज लगभग सभी सेक्टर गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे हैं.सबसे ज्यादा असर प्राइवेट बैंक (1.18% ) और ऑटो सेक्टर (0.65% ) पर पड़ी है। हालांकि, गिरावट के इस दौर में भी IT (1.28% ), फार्मा और ऑयल एंड गैस सेक्टर में थोड़ी हरियाली नजर आ रही है।
किन शेयरों में तेजी और कहां गिरावट?
सेंसेक्स पैक में आज बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी है. ICICI Bank, HDFC Bank, Larsen & Toubro, UltraTech Cement और Tata Steel जैसे बड़े दिग्गज शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है। हालांकि, इस लाल निशान वाले बाजार में भी आईटी (IT) सेक्टर के कुछ शेयरों ने उम्मीद की किरण जगाई है. HCL Tech, Tech Mahindra, Infosys, और TCS जैसे शेयर बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया स्थिर रहा और 2 पैसे बढ़कर 91.62 पर पहुंच गया। यह बढ़त अमेरिका द्वारा भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट की घोषणा के बाद हुई, जिससे पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा प्रवाह पर दबाव कम हुआ।
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क्या है विशेषज्ञों की राय?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की बढ़त हुई है, लेकिन यह पिछले भू-राजनीतिक संकटों के मुकाबले बड़ी तेजी नहीं है। इसका कारण वैश्विक बाजार में तेल की संभावित बड़ी आपूर्ति है।
उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है और बाजारों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
विजयकुमार के अनुसार, जब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तब तक बाजार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर कीमत 90 डॉलर से ऊपर बढ़कर 100 डॉलर के करीब पहुंचती है, तो इसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।