प्रयागराज : तीर्थराज प्रयाग की पावन धरती पर माघ मेला 2026 का शानदार शुभारंभ हो चुका है। शनिवार, 3 जनवरी को प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के अवसर पर संगम नगरी में आस्था का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि प्रशासन के सारे अनुमान पीछे छूट गए। कड़ाके की ठंड और सुबह के घने कोहरे के बावजूद, श्रद्धालुओं के जोश में कोई कमी नहीं दिखी। शाम 7 बजे तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 लाख से अधिक भक्तों ने गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में डुबकी लगाकर अक्षय पुण्य कमाया।
आस्था के आगे बौनी साबित हुई ठंड
सुबह की शुरुआत बर्फीली हवाओं और गलन के साथ हुई, लेकिन श्रद्धालुओं की श्रद्धा भारी पड़ी। ब्रह्म मुहूर्त से ही घाटों पर हर-हर गंगे और जय मां गंगे के उद्घोष गूंजने लगे थे। न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और दिल्ली समेत देश के कोने-कोने से श्रद्धालु त्रिवेणी तट पर पहुंचे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस आध्यात्मिक उल्लास का हिस्सा बना।
प्रशासन की चौकस व्यवस्था और सुरक्षा
मेला प्रशासन ने इस बार घाटों की लंबाई बढ़ाकर लगभग 10,000 फीट कर दी थी ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। मेले की सुरक्षा के लिए 10-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है। 1,600 से अधिक सीसीटीवी और एआई कैमरों के जरिए भीड़ पर नजर रखी जा रही है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एटीएस की मोबाइल टीमें लगातार गश्त कर रही हैं। श्रद्धालुओं के लिए 25,000 से अधिक चेंजिंग रूम और 50 से अधिक एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है।
कल्पवास का संकल्प
पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ ही संगम तट पर एक महीने तक चलने वाले कठिन ‘कल्पवास’ का भी आरंभ हो गया है। लाखों कल्पवासी अब अगले एक माह तक रेती पर तंबुओं के शहर में रहकर जप, तप और संयमित जीवन व्यतीत करेंगे।