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‘संघ कहे तो पद छोड़ने के लिए तैयार हूं’, RSS के कार्यक्रम में मोहन भागवत का बड़ा बयान, कहा- बांग्लादेश में 1.25 करोड़ हिंदू हैं, अगर वे एकजुट हो जाएं तो…’

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता को सभी वर्गों को साथ लेकर और आपसी सहमति से बनाया जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि यूसीसी के नाम पर समाज में. . .

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि समान नागरिक संहिता को सभी वर्गों को साथ लेकर और आपसी सहमति से बनाया जाना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि यूसीसी के नाम पर समाज में किसी भी तरह का विभाजन नहीं होना चाहिए। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान भागवत ने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने से पहले करीब तीन लाख सुझाव लिए गए और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद ही कानून बनाया गया। यही तरीका पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए।

संघ कहे तो पद छोड़ने के लिए तैयार हूं

मोहन भागवत ने कहा कि संघ ने उन्हें उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने को कहा है, लेकिन अगर संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे। आरएसएस का काम प्रचार करना नहीं बल्कि समाज में संस्कार विकसित करना है। जरूरत से ज्यादा प्रचार से दिखावा और फिर अहंकार आता है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए. सही समय पर और सीमित मात्रा में, संघ अपने स्वयंसेवकों से आखिरी बूंद तक काम लेता है। संघ के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई, जब किसी को जबरन रिटायर करना पड़ा।

बांग्लादेश में अभी भी 1.25 करोड़ हिंदू हैं

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के मुद्दे पर भागवत ने कहा, बांग्लादेश में अभी भी 1.25 करोड़ हिंदू हैं। यदि वे एकजुट हो जाएं, तो वे वहां की राजनीतिक व्यवस्था उपयोग अपने हित और अपनी सुरक्षा के लिए कर सकते हैं। लेकिन उन्हें एकजुट होना होगा। अच्छी बात यह है कि इस बार उन्होंने वहां से भागने का नहीं, बल्कि वहीं रहकर लड़ने का फैसला किया है। अगर अगर उन्हें लड़ना है है, तो एकता जरूरी होगी। जितनी जल्दी वे एकजुट होंगे, उतना ही बेहतर होगा।
बांग्लादेश में वर्तमान में हिंदुओं की जितनी संख्या मौजूद है, उससे वे अपनी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार कर सकते हैं। इसके लिए हम यहां अपनी सीमाओं के भीतर और दुनियाभर में अपने-अपने स्थानों पर मौजूद हिंदू, उनके लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। मैं आपको यह आश्वासन दे सकता हूं।

‘देश में बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक जैसी कोई चीज नहीं’

उन्होंने कहा कि देश में बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक जैसी कोई चीज नहीं है, हम सभी एक ही समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ विश्वास, मित्रता और संवाद की जरूरत पर जोर दिया। धर्म पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जब धर्म में आध्यात्मिकता नहीं रहती, तो वह आक्रामक और हावी होने लगता है। उन्होंने कहा कि आज इस्लाम और ईसाई धर्म में जो कुछ देखने को मिल रहा है, वह पैगंबर मोहम्मद और यीशु मसीह की मूल शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने ‘सच्चे इस्लाम और सच्ची ईसाइयत’ के पालन की बात कही।

‘सावरकर को भारत रत्न मिलने से बढ़ेगी उसकी गरिमा’

राम मंदिर और ‘अच्छे दिन’ के सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि आरएसएस के लिए अच्छे दिन भाजपा के सत्ता में आने से नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों की मेहनत और संगठन की वैचारिक प्रतिबद्धता से आए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में जो लोग संघ के साथ खड़े रहे, उन्हें उसका राजनीतिक लाभ मिला। हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर उन्होंने कहा कि अगर उन्हें यह सम्मान दिया जाता है, तो भारत रत्न की गरिमा और बढ़ेगी।

संघ जरूरत पड़ने पर सलाह देता है

आरएसएस और राजनीति के रिश्ते पर उन्होंने कहा कि संघ जरूरत पड़ने पर सलाह देता है, लेकिन राजनीतिक दबाव मतदाताओं का होता है, आरएसएस का नहीं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ‘राजनीति की गलतियों का दोष अक्सर हम पर मढ़ दिया जाता है।’ कम्युनिस्ट आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि पिछले 100 वर्षों में उनका आधार क्यों नहीं बढ़ा, इस पर आरएसएस उन्हें मार्गदर्शन दे सकता है, अगर वे चाहें।

आरएसएस एक युवा संगठन है

संघ की उम्र संरचना पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि आरएसएस एक युवा संगठन है, जहां स्वयंसेवकों की औसत उम्र 28 साल है, और इसे 25 साल तक लाने का लक्ष्य है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि उन्होंने इसके बारीक विवरण नहीं देखे हैं, लेकिन किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में लेन-देन और दोनों पक्षों का लाभ जरूरी होता है।

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