गयाजी। बिहार के गयाजी से देश की प्रसिद्ध नर्तकी-गायिका रही जद्दनबाई का गहरा संबंध रहा है। जद्दनबाई फिल्म अभिनेता संजय दत्त की नानी थी। गया शहर के पंचायती अखाड़ा रोड स्थित शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट परिसर में जद्दनबाई की हवेली थी। कहा जाता है कि लगभग 100 वर्ष पूरानी इस हवेली में रईसों की महफिल सजती थी और जद्दनबाई की ठुमरी गायन और नृत्य के एक से बढ़कर एक कद्रदान आते थे।
राजा-रजवाड़ों के लिए सजती थी महफिल
जद्दनबाई जब नृत्य करती थी तो राजा रजवाड़े मंत्र मुग्ध हो जाते थे. कहा जाता है कि इस हवेली में महफिल सजती थी। तब के समय में जद्दनबाई का ठुमरी गायन व नृत्य देखने व सुनने के लिए राजा-रजवाड़े सहित एक से बढ़कर एक कद्रदान आते थे। डायट परिसर में स्थित यह हवेली पहले ही जर्जर स्थिति में थी बची-खुची कसर सरकार ने पूरी कर दी। हाल के दिनो में हवेली को ध्वस्त कर दिया गया है और यहां बिहार शिक्षा परियोजना की एकेडमिक भवन बन रही है।
संजय दत्त की नानी की हवेली हुई ध्वस्त
स्थानीय लोगों और कला के दीवानों के लिए यह गर्व की बात थी कि जद्दन बाई की हवेली अपने शहर गयाजी में है। लोग इसे सांस्कृति धरोहर के रूप में देखते थे। देश-विदेश के संगीत प्रेमी कुछ दिनो पहले तक इस हवेली को देखने आते थे। हलेवी का दीदार करते हुए इसे प्रेरणा के तौर पर पेश करते थे। लेकिन अब यह हवेली पूरी तरह से ध्वस्त हो चूका है।
बिहार में 100 साल पुरानी हवेली ध्वस्त
करीब 100 साल पुरानी यह हवेली गया शहर की सांस्कृतिक पहचान थी। हवेली में जद्दनबाई की महफिलें लगती थी। जद्दनबाई ठुमरी गायन के लिए मशहूर थीं, जो भारतीय सिनेता में पहली महिला संगीतकार के रूप में पहचान बनायी थी। बताया जाता है आज जो पंचायती अखाड़ा मुहल्ला है, वह तब के समय में दौलत बाग राजवाड़ा था। दौलत बाग के नवाब जफरुद्दीन हुआ करते थे. जफर नवाब जद्दनबाई की ठुमरी से प्रभावित होकर अपने महल में ही जद्दनबाई को एक हवेली दे दी थी।
जद्दनबाई यहां कई वर्षों तक रहीं. बीच-बीच में कोलकाता, मुंबई में भी इनका कार्यक्रम आयोजित होता था। हिंदी फिल्मों में ब्रेक मिलने पर हमेशा के लिए जद्दनबाई मुंबई की होकर रह गयीं। जद्दनबाई यूपी की रहने वाली थी। गया आने के बाद ही वह कोलकाता और मुंबई पहुंची थी। गया में ही जद्दनबाई ने ठुमरी गायन और नृत्य में अद्भुत कला दिखाई। इसके बाद गया से ही वह कोलकाता और मुंबई को पहुंची थी और फिर गायकी, नृत्य और अभिनेत्री के क्षेत्र में अपना प्रतिभा दिखाई।
हवेली टूटने से प्रशंसक नाराज
हवेली टूटने से प्रशंसक काफी नाराज हैं. इसे दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं। प्रशंसकों का कहना है कि हम लोगों के द्वारा लगातार इसे संरक्षित करने की मांग की जाती रही किंतु हवेली को संरक्षित नहीं किया गया।यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस हवेली को संरक्षित करने के बजाए तोड़कर ध्वस्त कर दिया गया। इस तरह जद्दनबाई से जुड़ी एक बड़ी यादों को ध्वस्त कर दिया गया. सरकार को इसे संरक्षित करने की पहल करनी चाहिए थी।