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सिर्फ पार्थ नहीं ममता के 25 नेता रडार पर : गाय-कोयला तस्करी, बेहिसाब संपत्ति में फंसे 19 मंत्री और विधायक: दीदी के करीबी भी

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कोलकता। वामपंथियों के 34 साल के राज को खत्म कर 2011 में बंगाल की सत्ता पाने वाली ममता बनर्जी के करीब 25 विधायक ईडी-सीबीआई के रडार पर हैं। इनमें तृणमूल के मोस्ट सीनियर लीडर भी शामिल हैं। पार्टी के लिए चिंता का सबसे बड़ा सबब कोलकाता हाईकोर्ट का नया आदेश बन गया है।
2017 में कोलकाता के एक वकील बिप्लव रॉय चौधरी ने जनहित याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि 2011 से 2016 के बीच तृणमूल के 19 विधायकों की प्रॉपर्टी बेहिसाब बढ़ी। इसकी जांच होनी चाहिए। इनमें ममता के सबसे खास कहे जाने वाले और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम का नाम भी है।
50 करोड़ कैश वाले विजुअल्स दिखाए गए :
बिप्लव रॉय चौधरी की याचिका का 5 साल से निपटारा नहीं हुआ। पार्थ चटर्जी की सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के पास से 50 करोड़ रुपए और 5 किलो सोना मिलने के बाद चौधरी फिर हाईकोर्ट पहुंच गए। उन्होंने हाईकोर्ट में पार्थ से मिले कैश के विजुअल्स दिखाए और कहा कि 19 विधायकों की प्रॉपर्टी की जांच भी जल्दी होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने उनकी याचिका एक्सेप्ट कर ईडी को जांच में शामिल करने की बात कही। ईडी से इस बारे में 12 सितंबर तक जवाब मांगा गया है।
ईडी जांच के खिलाफ तीन मंत्री हाईकोर्ट पहुंचे :
हाईकोर्ट का आदेश आते ही तृणमूल के तीन मंत्री फिरहाद हकीम, ज्योतिप्रिया मलिक और अरूप रॉय भी कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने पिटीशन लगाकर कहा कि जांच में ईडी को शामिल नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि गड़बड़ी के कोई सबूत न इलेक्शन कमीशन को मिले और न ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को।
इसके अलावा भी कई सारी दलीलें रखी गईं। कोशिश यही है कि जांच ईडी के हाथ में नहीं दी जाना चाहिए। अब ईडीइसकी जांच करेगा या नहीं, यह हाईकोर्ट से तय होगा, लेकिन मामले को समझने वाले एक्सपर्ट कह रहे हैं कि ईडी की एंट्री होना तय है।
पश्चिम बंगाल के सीनियर जर्नलिस्ट स्निग्धेंदु भट्‌टाचार्य का कहना है कि ईडी के जांच में शामिल होते ही तृणमूल के 19 नेता बड़ी मुश्किल में फंस जाएंगे, क्योंकि उनकी प्रॉपर्टी कई गुना बढ़ी है, ये तो सच है। ये बात इन नेताओं ने ही अपने चुनावी एफिडेविड में बताई है। उसी को पिटीशनर ने आधार बनाया है।
तस्करी से घोटाले तक में फंसे मंत्री और विधायक :
पश्चिम बंगाल के मंत्री और विधायक गौ तस्करी, कोयला तस्करी और एसएससी स्कैम में ईडी और सीबीआई के निशाने पर हैं। पिछले हफ्ते सीबीआई ने अनुब्रत मंडल को बोलापुर में उनके घर से गिरफ्तार किया था। अनुब्रत ममता के सबसे खास लोगों में से हैं। वे बीरभूम जिले में पार्टी के चीफ भी हैं।
गिरफ्तारी के पहले सीबीआई ने उन्हें 10 बार नोटिस दिए, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए। इसके बाद उन्हें अरेस्ट किया गया। अनुब्रत को गौ-तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। उनसे जुड़ी 49 प्रॉपर्टी डीड भी सीबीआईI ने कोर्ट में दी हैं।
उनकी गिरफ्तारी पर ममता बनर्जी ने कहा कि ‘केष्टो (अनुब्रत मंडल) ने क्या किया है? पिछले साल वे घर में बंद थे, तब भी हम चुनाव जीते थे। ईडी और सीबीआई ने आधी रात को उनके घर में तोड़फोड़ की। यदि तुम एक केष्टो को अरेस्ट करोगे तो हम हजारों केष्टो खड़े कर देंगे। एक बार फिर से खेला होगा।’
इसी तरह शिक्षक भर्ती घोटाले में पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस मामले में जल्द विधायक माणिक भट्‌टाचार्य पर भी एक्शन हो सकता है। ईडी उनसे पूछताछ कर चुकी है। उन्हें नया नोटिस दिया गया है। ईडी के टॉप सोर्सेज के मुताबिक, जल्द ही भट्‌टाचार्य सहित टीएमसी से जुड़े 3-4 नेताओं को इस मामले में अरेस्ट किया जा सकता है।
8 आईपीएस को भी नोटिस, पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया :
सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि बंगाल के आईएएस, आईपीएस भी जांच एजेंसी के रडार पर हैं। कोयला घोटाले में 2 आईपीएस श्याम सिंह (डीआईजी सिविल डिफेंस) और आईबी राजीव मिश्रा (एडीजी आईजीपी) को नोटिस जारी हो चुका है। गाय तस्करी में 6 आईपीएसको नोटिस जारी हुआ है। इनमें सुकेश जैन, ज्ञानवंत सिंह, राजीब मिश्रा, श्याम सिंह, सेल्वा मुरूगना, कोटेश्वर राव का नाम शामिल है।
ीेड़ी की जांच में सामने आया है कि इन अफसरों को तस्करी के बारे में जानकारी थी, लेकिन इन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। अनुब्रत मंडल के गिरफ्तार होने के बाद इन अफसरों की परेशानी बढ़ गई है। सभी को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया गया है।
तृणमूल के बड़े चेहरे, जिनसे पूछताछ चल रही है :
अभिषेक बनर्जी : ममता बनर्जी के भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी कोयला घोटाले में ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं। अभिषेक और उनकी पत्नी रुजिरा को पूछताछ के लिए कई बार बुलाया जा चुका है।
पार्थ चटर्जी : एसएससी स्कैम में फंसे पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी अपनी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के साथ जेल में हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही टीएमसी ने उनसे दूरी बना ली है। उन्हें मंत्री पद से हटाते हुए पार्टी से भी बर्खास्त कर दिया गया है।
माणिक भट्‌टाचार्य : एसएससी टीचर रिक्रूटमेंट स्कैम के मामले में ही ईडी विधायक माणिक भट्‌टाचार्य से पूछताछ कर चुकी है। पार्थ चटर्जी के अरेस्ट के बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया था।
विनय मिश्रा : ईडी जुलाई 2022 में टीएमसी के यूथ विंग लीडर विनय मिश्रा से जुड़ी कंपनी की 13.63 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी अटैच कर चुकी है। इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस रजिस्टर्ड किया गया है।
टीएमसी के 25 नेता, जो जांच के घेरे में :
पार्टी के 19 नेता आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में फंसे हैं। इनमें फिरहाद हकीम, ज्योतिप्रिया मलिक, मलय घटक, ब्रात्य बासु, अर्जुन सिंह, गौतम देब, इकबाल अहमद, स्वर्ण कमल साहा, अरूप रॉय, जावेद अहमद खान, अमित मित्रा, अब्दुर रजक मोल्ला, राजीब बनर्जी, सेउली शाहा, सब्यासाची दत्ता, बिमान बनर्जी और मदन मित्रा शामिल हैं। वहीं सुब्रत मुखर्जी और साधन पांडे का निधन हो चुका है।
इसके अलावा शिक्षक भर्ती घोटाले में पार्थ चटर्जी जेल में हैं। अभिषेक बनर्जी, माणिक भट्‌टाचार्य, विनय मिश्रा और अनुब्रत मंडल से अलग-अलग मामलों में पूछताछ जारी है। 4-5 नेता ऐसे हैं, जिनके अभी नाम सामने नहीं आए हैं। जल्द ही इन तक सीबीआई-ईडी का नोटिस पहुंच सकता है।
ये खेल 2024 तक चलता रहेगा।
जर्नलिस्ट भट्‌टाचार्य कहते हैं कि ये खेल 2024 तक चलता रहेगा। अब सवाल सीबीआई- और ईडी की निष्पक्षता पर है। इनकी जांच और चुनावों की टाइमिंग मैच क्यों होती है। बंगाल में टीएमसी के जीतते ही उसके 4 नेताओं को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था। दो दिन रिमांड पर रखा। इन्हें नारदा केस में गिरफ्तार किया गया। यह केस करीब 8 साल पुराना है।
सवाल ये है कि 8 साल में भी सीबीआई केस खत्म क्यों नहीं कर पाई। चुनावों या नतीजों के आसपास ही गिरफ्तारी और नोटिस जारी क्यों होते हैं। इस मामले में कोलकाता हाईकोर्ट भी सीबीआई की आलोचना कर चुका है। हालांकि, नारदा केस में कोर्ट ने कोई डेडलाइन नहीं दी।
ममता सरकार में कई घोटाले, सीबीआई एक की भी जांच पूरी नहीं कर पाई
घोटाला : शिक्षक भर्ती
क्या हुआ : टॉपर का नाम हटाकर कम नंबर वालों को नौकरी दी गई। टॉपर से 16 नंबर कम पाने वाली मंत्री परेश अधिकारी की बेटी अंकिता को टॉपर बना दिया गया। इसी मामले में पार्थ चटर्जी जेल में हैं।
कब हुआ: 2016
अभी स्थिति : मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता जेल में हैं। जांच चल रही है।
घोटाला : शारदा चिटफंड
क्या हुआ : इसे बंगाल का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला कहा जाता है। शारदा नाम की कंपनी के जरिए करीब 10 लाख लोगों को ठगा गया। 40 हजार करोड़ रुपए के हेरफेर का अनुमान है।
कब हुआ: 2013
अभी स्थिति: 8 साल से CBI इसकी जांच कर रही है। ED भी इसमें शामिल है। अब तक न किसी की गिरफ्तारी हुई और न जांच पूरी हो सकी।
घोटाला: कोयला तस्करी
क्या हुआ: यह अवैध खनन का मामला है। इसमें ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी की भी जांच चल रही है। ये करीब 1352 करोड़ रुपए का घोटाला बताया जा रहा है।
कब हुआ: 2020
अभी स्थिति: सीबीआई जांच जारी है। अब तक क्लोजर रिपोर्ट पेश नहीं हो पाई है।
घोटाला: रोज वैली
क्या हुआ: रोज वैली कंपनी ने 464 करोड़ रुपए का चिटफंड घोटाला किया। लोगों को निवेश पर ज्यादा रिटर्न का लालच दिया गया। घोटाले में आरोपी गौतम कुंडु 2015 से जेल में है।
कब हुआ : 2013
अभी स्थिति : मामले की जांच सीबीआई के पास है, लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हो सकी।
घोटाला : नारदा स्टिंग ऑपरेशन
क्या हुआ : 2016 विधानसभा चुनाव के पहले इस स्टिंग के टेप वायरल किए गए थे। इसमें टीएमसी के मंत्री, सांसद और विधायक की तरह दिखने वाले लोगों को कंपनी के प्रतिनिधियों से रुपए लेते दिखाया गया था। यह ऑपरेशन नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था।
कब हुआ : 2016
अभी स्थिति: हाईकोर्ट के निर्देश पर 2017 से सीबीआई जांच कर रही है। कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इसमें भी जांच पूरी नहीं हो पाई है।


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