नई दिल्ली/कोलकाता। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। मंगलवार को कोलकाता स्थित राजभवन में SIR से प्रभावित परिवारों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ममता ने आरोप लगाया कि मताधिकार छीना जा रहा है और बंगाल को राजनीतिक बदले की भावना से निशाना बनाया जा रहा है। ममता बनर्जी के साथ मंच पर तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे। प्रेस वार्ता में SIR से प्रभावित परिवारों ने विरोध स्वरूप काली चादर ओढ़ रखी थी।
आवाज ऊँची कर डराने की कोशिश की गई
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने फूल दिए, लेकिन उन्होंने हमारा अपमान किया। चुनाव आयोग का व्यवहार असंवेदनशील और धमकी भरा रहा।” उन्होंने दावा किया कि आयोग के साथ बैठक में सवालों का जवाब नहीं दिया गया और उल्टे आवाज ऊँची कर डराने की कोशिश की गई। ममता ने बताया कि उन्होंने छह बार चुनाव आयोग को पत्र लिखा, लेकिन एक बार भी न जवाब मिला, न ही पत्र प्राप्ति की पुष्टि की गई। अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया कि यदि SIR कराना ही था तो 2024 में शुरू किया जा सकता था, ताकि 2025 में इसे व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाता। “हम SIR के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अव्यवस्थित और पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया के खिलाफ हैं,”।
राहुल गांधी बयान का किया समर्थन
मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि वह उनके इम्पीचमेंट की पक्षधर हैं, हालांकि संसद में उनके पास संख्या बल नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें भविष्य में कानून बनाकर कार्रवाई की बात कही गई थी।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “बंगाल में 33 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं। क्या उन्हें सरकारी सेवाओं और मतदान अधिकार से वंचित किया जाएगा?”
घुसपैठ के नाम पर डर फैलाया जा रहा है
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि तमिलनाडु में जिन दस्तावेजों को मान्यता दी जा रही है, वही बंगाल में क्यों अस्वीकार किए जा रहे हैं। ममता का दावा है कि अब तक एक भी रोहिंग्या मतदाता पकड़ा नहीं गया, फिर भी घुसपैठ के नाम पर डर फैलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर 58 लाख नाम भी हटाए जाते हैं, तब भी हम एक इंच जमीन नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर घुसपैठ हो रही है तो सीमा किसके हाथ में है।
ममता ने आरोप लगाया कि विपक्ष-शासित राज्यों में ही SIR कराया जा रहा है, जबकि असम और उत्तर-पूर्व के कई राज्यों में ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव से ठीक पहले SIR कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
राष्ट्रीय मीडिया पर भी लगाए आरोप
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला अब अदालत में विचाराधीन है और वह न्यायपालिका पर भरोसा रखती हैं। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय मीडिया पर भी बंगाल की वास्तविक स्थिति को सही तरीके से न दिखाने का आरोप लगाया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब राज्य में आगामी चुनावों से पहले SIR को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।