नई दिल्ली। अप्रैल का महीना आने में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं। एक अप्रैल से अपना नया वित्तीय वर्ष शुरू होगा। उसी दिन से आयकर (Income Tax) के नए प्रावधान लागू हो जाएंगे और आयकर अधिनियम, 2025 (Income Tax Act 2025) भी प्रभावी हो जाएगा। आयकर कानून के जानकार और इनकम टैक्स कंसल्टिंग फर्म Ravi Rajan & Co. LLP, Delhi के टैक्सेशन पार्टनर CA सी. कमलेश कुमार हमें बता रहे हैं कि इन प्रावधानों के बारे में।
क्या होगा बदलाव
आयकर कानून के नए प्रावधान लागू होने से आपका सैलरी स्ट्रक्चर बदल सकता है, भले ही आपका सीटूसी (Cost to Company) वही हो।। दरअसल, नए नियम कर दरों को नहीं बढ़ाते हैं। लेकिन, वे यह परिभाषित करते हैं कि वेतन भत्तों और अलाउंसेस का मूल्यांकन कैसे किया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि अब आपके वेतन पैकेज का एक बड़ा हिस्सा कर योग्य आय के रूप में माना जा सकता है।
टेक होम सैलरी पर प्रभाव
अब सरकार ने भत्तों (Perquisites), प्रतिपूर्ति (Reimbursements) और नियोक्ता द्वारा प्रदान किए गए लाभों (Employer-provided benefits) पर नियम कड़े करने के बाद, कर्मचारी यह महसूस कर सकते हैं कि उनकी टेक होम सैलरी, कर देयता (Tax liability), या वेतन का वितरण (Salary break-up) बदल सकता है जब कंपनियां नए ढांचे के अनुसार वेतन संरचनाओं को सही करेंगी।
सैलरी स्ट्रक्चर पर फोकस
न्यू इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत, अब नियोक्ताओं द्वारा प्रदान किए जाने वाले अधिकांश लाभों का स्पष्ट रूप से परिभाषित कर योग्य मूल्य (Taxable value) होता है। पहले, कुछ भत्ते ढीले-ढाले ढंग से परिभाषित थे। इससे कंपनियों को वेतन पैकेज बनाने में फ्लेक्जिबिलिटी मिलती थी। नए नियम उसे कम कर देते हैं। इसका मतलब यह है कि नियोक्ता वेतन के कंपोनेंट्स जैसे भत्ते, प्रतिपूर्ति और लाभों को नए मूल्यांकन नियमों के अनुपालन के लिए पुनर्गठित कर सकते हैं। नतीजतन, भले ही आपका कुल वेतन (CTC) न बदले, मूल वेतन, भत्ते और कर योग्य लाभों का अनुपात अप्रैल 2026 से अलग हो सकता है।
लेबर कोड के हिसाब से एडजस्टमेंट
आपको पता ही होगा कि पिछले साल ही देश में नए लेबर कोड्स लागू हो चुके हैं। उसी के हिसाब से अब कंपनियों को सैलरी स्ट्रक्चर बनाना होगा। नए लेबर कोड में स्पष्ट प्रावधान है कि अब श्रमिकों का मूल वेतन कुल CTC का कम से कम 50% होना चाहिए। इस वजह से अब कर्मचारियों का पीएफ या भविष्य निधि और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ सकता है। इस वजह से कर-मुक्त भत्तों के लिए उपलब्ध राशि कम हो सकती है।
पर्क्स ज्यादा तो टैक्सेबल
इनकम टैक्स रूल्स 2026 में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि सामान्य लाभों common benefits पर कैसे टैक्स लगाया जाए। इस कारण, कई पर्क्स (Perks) जो पहले टैक्स-फ्री मिलते थे, अब उन पर टैक्स लग सकता है। यदि किसी कर्मचारी को नियोक्ता की तरफ से आवास उपलब्ध कराया गया है तो उनकी सैलरी के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा। टैक्स कितना होगा, यह शहर पर निर्भर करेगा। लंबी अवधि के लिए कोई कर्मचारी यदि होटल में रहता है तो उसे भी टैक्सेबल लाभ माना जाएगा।
ऑफिस की सुविधा लेते हैं तो?
यदि आप ऑफिस मतलब कि कंपनी की कार अपने निजी उपयोग के लिए यूज करते हैं तो हर महीने उस पर एक फिक्स्ड टैक्सेबल वैल्यू आंका जाएगा। यदि उस गाड़ी के ड्राइवर का वेतन ऑफिस देता है तो इसका असर कर्मचारी के टैक्सेबल अमाउंट पर पड़ेगा। साथ ही ऑफिस से आपको घरेलू नौकर मिला है या आपके बिजली, पानी, गैस का बिल ऑफिस भरता है तो यह भी आपके टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा। ऑफिस आपके बच्चे की फीस भरता है और यह एक तय सीमा से अधिक है तो यह भी टैक्सेबल होगा। तय सीमा से अधिक का उपहार भी टैक्सेबल होगा। ऑफिसर की तरफ से मिला पेड होलीडे, क्लब की सदस्यता या कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर निजी खर्च भी टैक्सेबल होगा। अब ऐसे मूल्यांकन नियम को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया गया है।
ओल्ड बनाम न्यू टैक्स सिस्टम
ओल्ड बनाम न्यू टैक्स रूल्स के विकल्प पर भी ध्यान देना जरूरी है। नए नियम के तहत टैक्स के रेट कम हैं लेकिन ज्यादातर डिडक्शसंस और छूटें मान्य नहीं हैं। पुराने नियम के तहत, HRA, धारा 80C निवेश, और अन्य छूट जैसी कटौतियां कर योग्य आय को कम कर सकती हैं। यदि आपकी सैलरी में कई भत्ते और सुविधाएं शामिल हैं, तो पुराना सिस्टम अभी भी कर देयता को कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन यदि आपकी सैलरी स्ट्रक्चर सरल हो जाती है और छूट कम हो जाती हैं, तो नया टैक्स सिस्टम आसान विकल्प बन सकता है।
कर्मचारियों को क्या देखना चाहिए
@ कर्मचारियों को नए नियम लागू होने से पहले अपने सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा करनी चाहिए।
@ पूरा CTC ब्रेक-अप जांचें, जिसमें भत्ते और सुविधाएं शामिल हों।
@ समझें कि नए नियमों के तहत कौन-कौन से लाभ कर योग्य (Taxable) हैं।
@ दोनों कर प्रणाली के तहत कर देयता (Tax Burden) की तुलना करें।
@ आवश्यक होने पर अपने नियोक्ता के साथ संभावित पुनर्गठन पर चर्चा करें।